अयोध्या - उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी अयोध्या एक बार फिर इतिहास रचने की तैयारी में जुट गई है। भगवान श्रीराम की नगरी में दसवें दीपोत्सव को यादगार और भव्य बनाने के लिए तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। 7 नवंबर को आयोजित होने वाले इस विशेष कार्यक्रम में सरयू नदी के तट पर लाखों दीपक जलाकर रोशनी का अद्भुत नजारा प्रस्तुत किया जाएगा।
इस बार करीब 30 लाख मिट्टी के दीयों से रामनगरी को रोशन करने की योजना है। राम की पैड़ी समेत सरयू नदी के अलग-अलग घाटों पर दीप सजाने का काम शुरू हो चुका है। आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं और पर्यटकों में भी खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। वहीं, बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा से लेकर यातायात प्रबंधन तक व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं।
56 घाटों पर सजाए जा रहे लाखों मिट्टी के दीपक
अयोध्या के दीपोत्सव की सबसे बड़ी विशेषता यहां सरयू नदी के किनारे होने वाला दीपदान है। इस बार आयोजन को और आकर्षक बनाने के लिए कुल 56 घाटों को दीपों से सजाया जा रहा है। इन घाटों पर स्वयंसेवकों की बड़ी टीमें लगातार काम कर रही हैं। राम की पैड़ी सहित विभिन्न घाटों पर मिट्टी के दीपकों को निर्धारित स्थानों पर व्यवस्थित तरीके से रखा जा रहा है, ताकि दीपोत्सव के दिन एक साथ लाखों दीप जलने से पूरा सरयू तट रोशनी से जगमगा उठे।
करीब 30 लाख दीये जलाने की तैयारी इस आयोजन को खास बना रही है। दीपों की रोशनी के बीच सरयू नदी का किनारा और रामनगरी का धार्मिक वातावरण श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहेगा।
दसवें दीपोत्सव को यादगार बनाने की तैयारी
अयोध्या में दीपोत्सव का आयोजन अब केवल धार्मिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह देश-विदेश के लोगों के आकर्षण का बड़ा केंद्र बन चुका है। हर साल इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, पर्यटक और विशिष्ट अतिथि शामिल होते हैं।
इस बार दसवें दीपोत्सव को विशेष बनाने के लिए प्रशासन और आयोजन से जुड़ी टीमें पहले से ही तैयारियों में जुटी हैं। घाटों पर दीप सजाने के साथ-साथ आयोजन स्थल की व्यवस्था, लोगों की आवाजाही और अन्य जरूरी सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है। आयोजन का मुख्य आकर्षण सरयू तट पर होने वाला दीपदान रहेगा, जहां लाखों दीयों की रोशनी से अयोध्या का वातावरण भक्तिमय हो जाएगा।
सुरक्षा के लिए तीन स्तरीय व्यवस्था लागू
दीपोत्सव में भारी भीड़ जुटने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता दी है। पूरे आयोजन क्षेत्र को तीन स्तरों वाले सुरक्षा घेरे में बांटने की योजना बनाई गई है, ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था या अप्रिय घटना को रोका जा सके।
इस संबंध में मंगलवार को रामकथा पार्क परिसर में वरिष्ठ अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। एडीजी जोन प्रवीण कुमार की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में संबंधित अधिकारियों को उनकी जिम्मेदारियां समझाई गईं और आयोजन के दौरान सतर्कता बनाए रखने के निर्देश दिए गए।
वीवीआईपी मूवमेंट और यातायात पर विशेष ध्यान
सुरक्षा बैठक में भीड़ नियंत्रण, वीवीआईपी आवागमन और यातायात व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो और सभी व्यवस्थाएं निर्धारित योजना के अनुसार संचालित हों। इसके अलावा प्रमुख मार्गों, घाटों और आयोजन स्थलों पर सुरक्षा निगरानी मजबूत रखने पर जोर दिया गया है। पुलिस और प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने की भी व्यवस्था की जा रही है।
दीपों की रोशनी से जगमगाएगी भगवान राम की नगरी
7 नवंबर को होने वाले दीपोत्सव में जब 56 घाटों पर लाखों दीपक एक साथ प्रज्वलित होंगे, तब अयोध्या का नजारा बेहद भव्य और आकर्षक होने की उम्मीद है। सरयू नदी का तट, राम की पैड़ी और आसपास के धार्मिक स्थल दीपों की रोशनी से जगमगाएंगे।
30 लाख दीयों के साथ आयोजित होने वाला यह दसवां दीपोत्सव धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और अयोध्या की पहचान को एक बार फिर भव्य रूप में प्रस्तुत करेगा। अब सभी की निगाहें इस आयोजन पर टिकी हैं, जिसे सफल और सुरक्षित बनाने के लिए प्रशासन पूरी तैयारी में जुटा हुआ है।