लखनऊ - उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले जातीय समीकरणों और सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर बयानबाजी तेज होती दिखाई दे रही है। इसी बीच उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा है। राजभर ने सोशल मीडिया के माध्यम से सपा में यादव समाज के अलग-अलग वर्गों को मिलने वाले राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी में ही यादव समाज के भीतर भेदभाव किया जा रहा है।
2017 से 2024 तक के टिकट वितरण पर उठाए सवाल
ओम प्रकाश राजभर ने अपनी पोस्ट में अखिलेश यादव से सवाल किया कि वर्ष 2017 से लेकर 2024 तक समाजवादी पार्टी ने कितने घोसी (ग्वाला) समाज और कितने कमरिया समाज के लोगों को चुनाव लड़ने का मौका दिया। राजभर का कहना है कि सपा में टिकट वितरण के दौरान यादव समाज के सभी वर्गों को समान महत्व नहीं दिया गया। उन्होंने इस मुद्दे को उठाते हुए पार्टी की सामाजिक प्रतिनिधित्व नीति पर सवाल खड़े किए।
सुभासपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव यादव समाज के एक वर्ग को प्राथमिकता देते हैं, जबकि दूसरे बड़े वर्ग की राजनीतिक हिस्सेदारी को नजरअंदाज किया जा रहा है। उनके मुताबिक, यह स्थिति समाज के भीतर असंतोष पैदा कर सकती है।
15 और 85 फीसदी के आंकड़े से साधा निशाना
राजभर ने अपने बयान में 15 फीसदी कमरिया समाज और 85 फीसदी घोसी यानी ग्वाला समाज का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि अखिलेश यादव 15 फीसदी कमरिया समाज को अपना मानकर राजनीति कर रहे हैं, जबकि 85 फीसदी घोसी समाज की उपेक्षा की जा रही है। इसी आधार पर उन्होंने सपा अध्यक्ष की राजनीति पर सवाल उठाए।
उन्होंने यह भी कहा कि गाय-भैंस की देखभाल और पशुपालन से जुड़े अहीर समाज के लोग अब राजनीतिक परिस्थितियों को समझने लगे हैं। राजभर के इस बयान का मुख्य केंद्र यादव समाज के विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच प्रतिनिधित्व और हिस्सेदारी का मुद्दा रहा।
अखिलेश यादव पर समाज में विभाजन का आरोप
सुभासपा अध्यक्ष ने अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा कि उन्होंने पहली बार ऐसा यादव नेता देखा है, जो अपने ही अहीर समाज के बीच अंतर पैदा कर रहा है। राजभर ने आरोप लगाया कि सपा प्रमुख जाति के नाम पर समाज को एकजुट करने के बजाय उसके अलग-अलग वर्गों के बीच विभाजन की राजनीति कर रहे हैं।
राजभर ने अखिलेश यादव को नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें अब इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उनका दावा है कि समाज के सभी वर्गों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व में उचित स्थान मिलना चाहिए। हालांकि, टिकट वितरण को लेकर लगाए गए इन आरोपों और प्रस्तुत किए गए आंकड़ों को राजभर के राजनीतिक दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर दी चेतावनी
ओम प्रकाश राजभर ने अपने बयान में आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि 85 फीसदी घोसी यानी ग्वाला समाज इस बार समाजवादी पार्टी को वर्ष 2022 के चुनाव से भी खराब स्थिति दिखाएगा। इस बयान के जरिए उन्होंने संकेत दिया कि यादव समाज के भीतर राजनीतिक प्रतिनिधित्व का सवाल आने वाले चुनाव में चर्चा का विषय बन सकता है।
दरअसल, उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय समीकरण चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा रहे हैं। ऐसे में राजभर का यह बयान सपा के सामाजिक आधार और यादव समाज के विभिन्न वर्गों की हिस्सेदारी को लेकर नई राजनीतिक बहस खड़ी करता है। अब इस मुद्दे पर अखिलेश यादव या समाजवादी पार्टी की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर राजनीतिक हलकों की नजर रहेगी।