देहरादून - उत्तराखंड के स्थापना दिवस के अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर बड़ा बयान दिया है। शुक्रवार को देहरादून में आयोजित 'उत्तराखंड राज्योत्सव' समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तराखंड ने समान नागरिक संहिता लागू करके देश के सामने एक नई मिसाल पेश की है। अब देश के 15 अन्य राज्य भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। अमित शाह ने स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी धीरे-धीरे अपने शासन वाले सभी राज्यों में यूसीसी लागू करेगी। इस दौरान उन्होंने चार शादियों और तीन तलाक जैसे मुद्दों का जिक्र करते हुए लोगों से सवाल भी किया, जिस पर सभा में मौजूद लोगों ने जवाब दिया।
चार शादी और तीन तलाक को लेकर अमित शाह ने क्या कहा?
राज्योत्सव समारोह में अपने संबोधन के दौरान अमित शाह ने समान नागरिक संहिता के प्रावधानों और उसके उद्देश्य को लेकर जनता से संवाद किया। उन्होंने लोगों से सवाल किया कि क्या देश में किसी व्यक्ति को चार शादियां करने की अनुमति होनी चाहिए? क्या किसी महिला को तीन तलाक देने की अनुमति होनी चाहिए? उनके इन सवालों पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने 'नहीं' में जवाब दिया।
इसके बाद गृह मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने के बाद अब कोई भी व्यक्ति चार शादियां नहीं कर सकता और न ही किसी महिला को तीन तलाक दे सकता है। उन्होंने इस कानून को महिलाओं के अधिकारों और समानता से जोड़ते हुए राज्य सरकार के कदम की सराहना की।
15 और राज्य यूसीसी लागू करने की दिशा में आगे बढ़े
अमित शाह ने अपने संबोधन में दावा किया कि उत्तराखंड के बाद देश के 15 अन्य राज्य भी समान नागरिक संहिता बनाने की दिशा में आगे बढ़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड ने इस कानून को लागू करके दूसरे राज्यों के लिए रास्ता तैयार किया है। बीजेपी की योजना है कि आने वाले समय में पार्टी शासित सभी राज्यों में इसे लागू किया जाए।
गृह मंत्री के मुताबिक, समान नागरिक संहिता का उद्देश्य देश में नागरिकों के लिए विवाह, तलाक और उत्तराधिकार जैसे व्यक्तिगत मामलों में समान कानूनी व्यवस्था तैयार करना है। उन्होंने इसे समानता और सामाजिक न्याय से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम बताया।
क्या है समान नागरिक संहिता (UCC)?
समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड एक ऐसी कानूनी व्यवस्था है, जिसके तहत सभी धर्मों के नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और अन्य पारिवारिक मामलों में समान नियम लागू करने की परिकल्पना की गई है।
वर्तमान में भारत में अलग-अलग धार्मिक समुदायों के पारिवारिक मामलों को लेकर अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं। यूसीसी का उद्देश्य इन मामलों में एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना है। उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जहां इस कानून को लागू किया गया है।
बीजेपी शासित राज्यों में लागू करने की तैयारी
अमित शाह ने अपने संबोधन में साफ किया कि यूसीसी को लेकर बीजेपी की नीति केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं रहेगी। पार्टी इसे धीरे-धीरे अपने शासन वाले सभी राज्यों में लागू करने की दिशा में काम करेगी।
इससे पहले भी गृह मंत्री यूसीसी को लेकर अपनी सरकार की मंशा जाहिर कर चुके हैं। सितंबर 2026 में उन्होंने कहा था कि बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए की 21 राज्य सरकारें 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में आगे बढ़ेंगी।
उत्तराखंड बना यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता को जनवरी 2025 से लागू किया गया था। इसके बाद राज्य में विवाह पंजीकरण, तलाक, लिव-इन रिलेशनशिप और उत्तराधिकार जैसे मामलों को लेकर नए प्रावधान लागू हुए। अमित शाह ने राज्य स्थापना दिवस के मंच से इस कानून को दूसरे राज्यों तक पहुंचाने की बात दोहराई।
गृह मंत्री के इस बयान के बाद अब नजरें उन राज्यों पर रहेंगी, जो यूसीसी को लेकर अपनी कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ा रहे हैं। हालांकि, बीजेपी शासित सभी राज्यों में इसे लागू करने की कोई नई निश्चित तारीख इस संबोधन में घोषित नहीं की गई।
इस तरह उत्तराखंड स्थापना दिवस के मौके पर अमित शाह ने यूसीसी को लेकर केंद्र और बीजेपी की भावी रणनीति का संकेत दिया। उनका कहना है कि आने वाले समय में समान नागरिक संहिता का दायरा उत्तराखंड से आगे बढ़ाकर अन्य राज्यों तक पहुंचाया जाएगा।