भोपाल: मध्य प्रदेश में व्यापारी 23 सितंबर को ‘नो UPI डे’ के जरिए 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI भुगतान पर MDR को लेकर सांकेतिक विरोध दर्ज कराने की तैयारी में हैं। व्यापारियों ने UPI स्कैनर पर काला कपड़ा डालकर विरोध जताने का फैसला किया है। व्यापारी वर्ग का कहना है कि 2,000 रुपये से अधिक के UPI लेनदेन पर शुल्क लगने से कारोबारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ सकता है। खासकर थोक कारोबार में जहां बड़े मूल्य के डिजिटल भुगतान आम हैं, वहां इस फैसले को लेकर चिंता जताई जा रही है।
UPI स्कैनर पर काला कपड़ा डालेंगे व्यापारी
23 सितंबर को प्रस्तावित ‘नो UPI डे’ के दौरान व्यापारी अपने प्रतिष्ठानों पर लगे UPI स्कैनर पर काला कपड़ा डालकर सांकेतिक विरोध दर्ज कराएंगे। व्यापारियों के अनुसार, इसका उद्देश्य 2,000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर MDR से जुड़े फैसले के प्रति अपनी आपत्ति दर्ज कराना है।
थोक किराना बाजार में बड़े UPI लेनदेन
व्यापारी संगठनों के मुताबिक, थोक किराना बाजार में 90 फीसदी से अधिक लेनदेन 2,000 रुपये से ज्यादा के होते हैं। ऐसे में बड़े डिजिटल भुगतान पर शुल्क लागू होने की स्थिति में कारोबारियों की लागत बढ़ने की आशंका है। व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने कैशलेस लेनदेन को अपनाया और ग्राहकों को भी डिजिटल भुगतान के लिए प्रोत्साहित किया। अब शुल्क की व्यवस्था आने से व्यापारियों के बीच इसे लेकर असंतोष है।
2,000 रुपये से ज्यादा के UPI भुगतान पर शुल्क का विरोध
व्यापारी वर्ग की मुख्य आपत्ति 2,000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर MDR को लेकर है। उनका कहना है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के बाद अब इस तरह का शुल्क कारोबारियों के लिए अतिरिक्त खर्च का कारण बन सकता है। हालांकि, शुल्क से जुड़ी वास्तविक व्यवस्था और उसके लागू होने की शर्तों को लेकर व्यापारियों और संबंधित पक्षों के बीच चर्चा जारी है।
16 अक्टूबर से पेट्रोल पंपों पर भी विरोध का ऐलान
UPI शुल्क को लेकर विरोध सिर्फ व्यापारिक बाजारों तक सीमित नहीं है। व्यापारियों के अनुसार, 16 अक्टूबर से मध्य प्रदेश के करीब 4,700 पेट्रोल पंपों पर भी 2,000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान के विरोध का ऐलान किया गया है। यदि यह विरोध लागू होता है तो बड़े डिजिटल भुगतान करने वाले ग्राहकों को पेट्रोल पंपों पर भुगतान के अन्य विकल्पों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है।
व्यापारियों का कहना- बढ़ सकता है आर्थिक बोझ
व्यापारी वर्ग का कहना है कि बड़े मूल्य के डिजिटल भुगतान पर MDR लागू होने से कारोबार की लागत बढ़ सकती है। इसी मुद्दे को लेकर 23 सितंबर का विरोध सांकेतिक रूप से आयोजित किया जा रहा है। अब देखना होगा कि इस विरोध के बाद सरकार और संबंधित पक्षों की ओर से व्यापारियों की आपत्तियों पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।