ग्वालियर: आयुष्मान योजना के तहत निजी अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत ग्वालियर, भोपाल, इंदौर और जबलपुर के अनुबंधित निजी अस्पतालों में मेडिसिन पैकेज के तहत उपचार के लिए NABH (National Accreditation Board for Hospitals) प्रमाणपत्र जरूरी होगा। नई व्यवस्था 1 अक्टूबर 2026 से लागू होने जा रही है। ग्वालियर में NABH प्रमाणपत्र नहीं होने के कारण करीब 79 निजी अस्पताल मेडिसिन पैकेज के तहत आयुष्मान योजना के दायरे से बाहर हो सकते हैं।
1 अक्टूबर से लागू होगी नई व्यवस्था
सरकार की नई व्यवस्था के तहत संबंधित निजी अस्पतालों को आयुष्मान योजना के मेडिसिन पैकेज के तहत मरीजों का उपचार जारी रखने के लिए NABH प्रमाणपत्र की शर्त पूरी करनी होगी। जिन अस्पतालों के पास निर्धारित प्रमाणपत्र नहीं होगा, वे 1 अक्टूबर से मेडिसिन पैकेज के तहत आयुष्मान मरीजों का इलाज नहीं कर सकेंगे। ऐसे मरीजों को योजना के तहत पात्र दूसरे अस्पतालों में उपचार कराना होगा।
ग्वालियर के 79 निजी अस्पतालों पर असर
नई व्यवस्था का ग्वालियर के निजी अस्पतालों पर खासा असर पड़ने की संभावना है। जानकारी के अनुसार, NABH प्रमाणपत्र नहीं होने के कारण 79 निजी अस्पताल आयुष्मान योजना के संबंधित दायरे से बाहर हो सकते हैं। सरकार के इस फैसले के बाद निजी अस्पताल संचालकों में चिंता है। अस्पताल संचालकों का कहना है कि NABH की प्रक्रिया पूरी करने में समय लगता है और सभी अस्पतालों के लिए कम समय में प्रमाणपत्र हासिल करना आसान नहीं है।
ज्यादा आयुष्मान मरीजों वाले अस्पतालों ने शुरू की तैयारी
नई व्यवस्था को देखते हुए उन निजी अस्पतालों ने एंट्री लेवल NABH की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जहां आयुष्मान योजना के तहत बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। इन अस्पतालों का प्रयास है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर जरूरी प्रक्रिया पूरी कर प्रमाणपत्र हासिल किया जा सके, ताकि आयुष्मान मरीजों का इलाज प्रभावित न हो।
27 सितंबर को होगी निजी अस्पताल संगठनों की बैठक
सरकार के फैसले को लेकर निजी अस्पताल संचालकों के संगठन की 27 सितंबर को बैठक प्रस्तावित है। इसमें नई व्यवस्था से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं और आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी। नर्सिंग होम संगठन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राकेश रायजादा के मुताबिक, बैठक में अस्पताल संचालकों की समस्याओं को सरकार के सामने रखने और प्रमाणपत्र हासिल करने के लिए अतिरिक्त समय देने की मांग पर चर्चा की जाएगी।
मरीजों पर क्या होगा असर?
यदि कोई अस्पताल 1 अक्टूबर तक NABH प्रमाणपत्र की निर्धारित शर्त पूरी नहीं करता है, तो वहां आयुष्मान योजना के तहत मेडिसिन पैकेज में उपचार की सुविधा प्रभावित होगी। ऐसे मरीजों को योजना में शामिल दूसरे पात्र अस्पतालों में इलाज कराना होगा। इससे NABH प्रमाणपत्र वाले अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ने की संभावना है। नई व्यवस्था का उद्देश्य आयुष्मान योजना से जुड़े निजी अस्पतालों में उपचार की गुणवत्ता से संबंधित मानकों को सुनिश्चित करना बताया गया है। वहीं निजी अस्पताल संचालक प्रमाणपत्र प्रक्रिया के लिए पर्याप्त समय की मांग कर रहे हैं।