मॉस्को: रूस में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के नेतृत्व वाली राजनीतिक व्यवस्था को संसदीय चुनाव में बड़ी सफलता मिली है। पुतिन समर्थक यूनाइटेड रशिया पार्टी ने स्टेट ड्यूमा की 450 सीटों में से 355 सीटें जीतने का दावा किया है। यह पार्टी के संसदीय इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
57.83% वोट शेयर, पिछली बार से बड़ा उछाल
रूस के केंद्रीय चुनाव आयोग के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, 95 फीसदी से अधिक मतों की गिनती के बाद यूनाइटेड रशिया को पार्टी-लिस्ट वोट में 57.83 प्रतिशत वोट मिले हैं। 2021 के पिछले संसदीय चुनाव में पार्टी का वोट शेयर करीब 49.8 प्रतिशत था। यानी इस बार पार्टी के वोट शेयर में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज हुई है।
355 सीटों के साथ संवैधानिक बहुमत
यूनाइटेड रशिया के खाते में 355 सीटें जाने का मतलब है कि पार्टी के पास 450 सदस्यीय ड्यूमा में संवैधानिक बहुमत रहेगा। इससे संसद में कानूनों और संवैधानिक बदलावों से जुड़े मामलों में पार्टी की ताकत और बढ़ेगी। इससे पहले पार्टी का सबसे बड़ा आंकड़ा 2016 में 343 सीटों का था।
18 से 20 सितंबर तक हुआ मतदान
रूस में स्टेट ड्यूमा के लिए मतदान 18 से 20 सितंबर 2026 तक तीन दिनों में कराया गया। यह 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूस का पहला संसदीय चुनाव था। चुनाव के दौरान यूक्रेन से जुड़े क्षेत्रों में भी मतदान कराया गया, जिसकी वैधता को लेकर यूक्रेन और पश्चिमी देशों ने आपत्ति जताई है।
विपक्ष की भागीदारी को लेकर उठे सवाल
चुनाव में यूनाइटेड रशिया का दबदबा कायम रहा, लेकिन मतदान प्रक्रिया को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल भी उठे। कई विपक्षी नेताओं और पश्चिमी सरकारों ने आरोप लगाया कि चुनावी माहौल में प्रभावी विपक्ष की भूमिका सीमित रही। वहीं, रूसी अधिकारियों ने चुनाव को वैध बताते हुए परिणामों को जनता के समर्थन और राजनीतिक एकजुटता का संकेत बताया है।
संसद में बाकी पार्टियों की स्थिति
प्रारंभिक परिणामों के मुताबिक कम्युनिस्ट पार्टी को 40 सीटें, LDPR को 25 सीटें और न्यू पीपल पार्टी को 20 सीटें मिलने की जानकारी सामने आई है। इसके साथ ही यूनाइटेड रशिया का संसदीय बहुमत अन्य सभी दलों की संयुक्त ताकत से भी काफी बड़ा रहेगा।
पुतिन के लिए चुनाव का राजनीतिक महत्व
पुतिन ने इस चुनाव को यूक्रेन युद्ध के बीच देश में समर्थन और एकजुटता के संकेत के तौर पर पेश किया था। नतीजों के बाद क्रेमलिन की ओर से भी चुनाव को पुतिन के नेतृत्व के प्रति समर्थन से जोड़ा गया। हालांकि, चुनाव की प्रक्रिया और विपक्ष की भागीदारी को लेकर अलग-अलग पक्षों की व्याख्याएं सामने आई हैं।