न्यूज डेस्क। पुलिसकर्मियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल, वर्दी में रील बनाने और शासकीय जानकारी साझा करने को लेकर नए दिशानिर्देश सामने आए हैं। साझा विवरण के अनुसार, पुलिस मुख्यालय ने सोमवार को 24 बिंदुओं वाली गाइडलाइन जारी की है। इसमें ड्यूटी के दौरान या ड्यूटी के बाद वर्दी अथवा अशोभनीय वेशभूषा में रील बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने वाले पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की बात कही गई है। निर्देशों में ChatGPT और अन्य माध्यमों पर शासकीय जानकारी अपलोड करने पर भी रोक का उल्लेख है। गाइडलाइन केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के आलोक में जारी किए जाने की जानकारी दी गई है।
वर्दी में रील बनाने पर नोटिस से निलंबन तक की कार्रवाई
गाइडलाइन के साझा विवरण के मुताबिक, सोशल मीडिया पर पुलिसकर्मियों के आचरण को लेकर विभागीय निर्देशों का पालन जरूरी होगा। ड्यूटी के दौरान ही नहीं, ड्यूटी समाप्त होने के बाद भी वर्दी में रील बनाकर पोस्ट करने पर कार्रवाई हो सकती है। उल्लंघन की प्रकृति के अनुसार संबंधित पुलिसकर्मी को कारण बताओ नोटिस दिया जा सकता है। गंभीर मामलों में लागू सेवा और आचरण संबंधी नियमों के तहत निलंबन जैसी कार्रवाई भी संभव है। हर मामले में एक जैसी कार्रवाई के बजाय उल्लंघन की गंभीरता के आधार पर निर्णय लेने की बात कही गई है।
ChatGPT पर नहीं डाल सकेंगे शासकीय जानकारी
पुलिसकर्मियों को ChatGPT या अन्य ऑनलाइन माध्यमों में शासकीय जानकारी अपलोड नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ गोपनीय और संवेदनशील सूचनाओं को इंटरनेट पर साझा करने से भी रोका गया है। यहां स्पष्ट अंतर है कि साझा विवरण में प्रतिबंध शासकीय जानकारी अपलोड करने पर बताया गया है। इसमें ChatGPT के हर प्रकार के निजी या गैर-शासकीय इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध का उल्लेख नहीं है।
गिरफ्तारी और छापेमारी की जानकारी साझा करने में बरतनी होगी सावधानी
गिरफ्तारी, छापेमारी और आपराधिक जांच से संबंधित जानकारी साझा करते समय अधिकतम सावधानी बरतने को कहा गया है। ऐसी सूचना आवश्यक तथ्यों तक सीमित रखनी होगी। जांच की प्रक्रिया और भविष्य में की जाने वाली कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक नहीं किया जा सकेगा, ताकि जांच प्रभावित न हो। संवेदनशील मामलों में अलग-अलग अधिकारियों की ओर से अलग-अलग जानकारी दिए जाने से भी बचने के निर्देश हैं। पुलिस की ओर से जारी सूचना ऐसी नहीं होनी चाहिए, जिससे जांच या न्यायिक निर्णय से पहले ही किसी आरोपित को दोषी मान लेने का संकेत मिले।
निजी खाते से सरकारी नीतियों पर टिप्पणी नहीं
साझा गाइडलाइन के अनुसार, पुलिसकर्मियों को अपने निजी सोशल मीडिया खातों से भी सरकारी नीतियों और योजनाओं पर राय व्यक्त नहीं करने को कहा गया है। सार्वजनिक मंचों पर राजनीतिक या धार्मिक बयानबाजी से बचने की हिदायत भी दी गई है। किसी कर्मचारी की निजी टिप्पणी से सरकार का आधिकारिक पक्ष होने का भ्रम पैदा होने पर विभाग की ओर से स्पष्टीकरण जारी किया जा सकता है। गंभीर मामलों में विषय को सक्षम स्तर पर भेजकर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का उल्लेख है।
सरकारी वाहन, कार्यालय और वर्दी का निजी प्रचार में इस्तेमाल नहीं
पुलिसकर्मियों को सरकारी वाहन, कार्यालय, आवास, वर्दी और अन्य सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल व्यक्तिगत छवि बनाने के लिए नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकारी तंत्र या मीडिया संवाद को किसी अधिकारी के निजी प्रचार का माध्यम नहीं बनाया जा सकेगा। विभाग की उपलब्धियों को भी किसी एक अधिकारी की व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करने से बचना होगा। निर्देशों में विभागीय कार्य और व्यक्तिगत प्रचार के बीच अंतर बनाए रखने पर जोर दिया गया है।
संवेदनशील ड्यूटी और कार्यस्थल का खुलासा करने पर रोक
संवेदनशील जिम्मेदारियां संभाल रहे पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी की सटीक प्रकृति, कार्यस्थल और काम से जुड़ी गतिविधियों का विवरण सोशल मीडिया पर साझा नहीं कर सकेंगे। गोपनीय सूचनाओं को इंटरनेट पर सार्वजनिक करने से भी रोका गया है। विभागाध्यक्ष की ओर से सोशल मीडिया और मीडिया संवाद के संबंध में जारी निर्देशों का उल्लंघन गंभीरता से लेने की बात कही गई है। साझा विवरण के अनुसार, गंभीर मामलों में संबंधित अधिकारी के साथ उसके नियंत्रण अधिकारी की भूमिका भी देखी जा सकती है और आवश्यक सुधारात्मक या अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।