पंजाब - पंजाब में नशे का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में है। भाजपा नेता गौरव भाटिया ने सोमवार को नशा-मुक्त पंजाब अभियान को लेकर आम आदमी पार्टी की सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा ने पंजाब को नशा-मुक्त बनाने का संकल्प लिया है और इसी उद्देश्य से पार्टी की ओर से राज्यव्यापी ‘नशा-मुक्ति यात्रा’ शुरू की गई है।
117 विधानसभा क्षेत्रों से गुजरेगी यात्रा
गौरव भाटिया ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की ओर से पंजाब में शुरू की गई नशा-मुक्ति यात्रा का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह यात्रा राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों से होकर गुजरेगी और नशे के खिलाफ जनजागरूकता का संदेश देगी। भाजपा की ओर से इस अभियान को पंजाब में नशे की समस्या के खिलाफ व्यापक राजनीतिक और जनसंपर्क अभियान के तौर पर पेश किया जा रहा है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, पार्टी की चार यात्राओं को राज्य की सभी विधानसभा सीटों तक ले जाने की योजना है।
‘सूर्य अस्त, भगवंत चिट्टा मस्त’ नारे का इस्तेमाल
गौरव भाटिया ने अपने बयान में ‘सूर्य अस्त, भगवंत चिट्टा मस्त’ नारे का इस्तेमाल करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान पर राजनीतिक हमला बोला। यह भाजपा नेता का राजनीतिक आरोप है, जिसे उन्होंने पंजाब में नशे की स्थिति और राज्य सरकार की भूमिका पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि भाजपा का उद्देश्य पंजाब की धरती से नशे के कारोबार और उसके प्रभाव को खत्म करने के लिए अभियान चलाना है।
जग्गा सिंह का भी उठाया मुद्दा
भाजपा नेता ने अपने बयान में जग्गा सिंह का भी जिक्र किया। भाटिया ने दावा किया कि जग्गा सिंह ने पंजाब, खासकर संगरूर में कथित नशे और ड्रग्स के कारोबार का मुद्दा उठाया था। भाटिया के मुताबिक, शिकायत करने के बाद जग्गा सिंह के खिलाफ कार्रवाई की गई और उन्हें धमकाने तथा मारपीट किए जाने जैसी घटनाएं हुईं। उन्होंने आरोप लगाया कि नशे से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय शिकायतकर्ता को ही निशाना बनाया गया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है। भाटिया ने ये बातें अपने राजनीतिक बयान के दौरान कही हैं।
नशे के मुद्दे पर बढ़ी सियासी बयानबाजी
पंजाब में नशे का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक दलों के बीच बहस का विषय रहा है। भाजपा की नशा-मुक्ति यात्रा के जरिए पार्टी ने इसे राज्यव्यापी अभियान का रूप देने की कोशिश की है। दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। भाजपा का कहना है कि नशे के खिलाफ लड़ाई में युवाओं, परिवारों और सामाजिक संगठनों की भागीदारी जरूरी है। ऐसे में 117 विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचने वाली यात्रा के दौरान नशे के खिलाफ जागरूकता और राज्य सरकार की नीतियां दोनों ही राजनीतिक चर्चा के प्रमुख मुद्दे बने रहने की संभावना है।