लखनऊ - उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के ‘PDA रथ’ को लेकर निशाना साधा है। उन्होंने रथ के रंग को लेकर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इसमें सपा के पारंपरिक लाल रंग की तुलना में भगवा रंग ज्यादा दिखाई दे रहा है। मायावती ने इसे RSS और भाजपा के भगवा रंग से जोड़ा और सवाल किया कि क्या सपा का मुस्लिम मतदाताओं पर भरोसा कम हो गया है।
मायावती ने ‘PDA रथ’ के रंग पर उठाए सवाल
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिए तैयार किया गया सपा का ‘PDA रथ’ पार्टी के लाल रंग से ज्यादा भगवा नजर आ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह चुनावी लाभ के लिए लगातार राजनीतिक रंग बदलने की रणनीति है या फिर सपा प्रमुख का मुस्लिम वोट हासिल करने को लेकर भरोसा कम हुआ है।
सपा की ओर से अखिलेश यादव 24 सितंबर को इस रथ के जरिए चुनावी अभियान की शुरुआत करने वाले हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, इसके लिए एक विशेष मल्टी-एक्सल बस तैयार की गई है और अखिलेश यादव रायबरेली में हरचंदपुर से जुड़े कार्यक्रम में शामिल होंगे।
मुस्लिम वोट को लेकर भी मायावती का दावा
मायावती ने अपने बयान में दावा किया कि पिछले चुनावों में मुस्लिम मतदाताओं के बड़े समर्थन के बावजूद सपा भाजपा को यूपी और केंद्र में सत्ता में आने से नहीं रोक सकी। इसी आधार पर उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम समाज का एक वर्ग अब सपा से दूरी बनाकर बसपा की ओर रुख कर रहा है। उन्होंने सवर्ण समाज, खासकर ब्राह्मणों के बीच भी बसपा के समर्थन का दावा किया। ये मायावती के राजनीतिक दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
‘PDA’ की परिभाषा पर भी साधा निशाना
बसपा प्रमुख ने सपा के ‘PDA’ फॉर्मूले को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा ने अलग-अलग मौकों पर ‘PD’ की अलग-अलग व्याख्या की है। मायावती ने अखिलेश यादव के नीले रंग के कपड़े या प्रतीकों के इस्तेमाल का जिक्र करते हुए इसे बसपा की अंबेडकरवादी राजनीति से जोड़ने की कोशिश बताया और सपा पर राजनीतिक लाभ के लिए प्रतीकों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।
दरअसल, सितंबर में अखिलेश यादव और समाजवादी छात्रसभा से जुड़े नीले रंग के कपड़ों के इस्तेमाल को लेकर भी चर्चा हुई थी। रिपोर्टों में इसे सपा के दलित और बहुजन मतदाताओं तक पहुंच बढ़ाने की कोशिश के संदर्भ में देखा गया।
बसपा को बताया अंबेडकरवादी पार्टी
मायावती ने इसके बाद बसपा को ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नीति वाली अंबेडकरवादी पार्टी बताया। उन्होंने कहा कि बसपा सभी वर्गों के लिए रोजगार, आत्मसम्मान और सामाजिक कल्याण की राजनीति की पक्षधर है। साथ ही उन्होंने अपने शासनकाल का हवाला देते हुए कानून-व्यवस्था और जनकल्याण के क्षेत्र में किए गए कार्यों को भी गिनाया। ये उनके राजनीतिक दावे और पार्टी की स्थिति हैं।
चुनाव से पहले बढ़ी सपा-बसपा की टक्कर
यूपी में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच सपा और बसपा दोनों अपने-अपने सामाजिक आधार को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। अखिलेश यादव का PDA अभियान जहां पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समूहों को केंद्र में रखकर आगे बढ़ाया जा रहा है, वहीं मायावती सपा की इसी रणनीति पर सवाल उठा रही हैं। ऐसे में ‘PDA रथ’, लाल-भगवा रंग और नीले प्रतीकों को लेकर शुरू हुई सियासी बहस आने वाले चुनावी अभियान में एक अहम मुद्दा बन सकती है।