भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 22 सितंबर को ऑल इंडिया डिस्कॉम्स एसोसिएशन द्वारा भोपाल में आयोजित "नवीकरणीय ऊर्जा एवं ऊर्जा भंडारण की किफायती विद्युत खरीद" कार्यशाला में शामिल हुए। उन्होंने कार्यशाला का दीप प्रज्ज्वलन कर शुभारंभ किया। उन्होंने एसोसिएशन की पुस्तक का विमोचन भी किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार सभी प्रदेशवासियों को सस्ती दरों पर बिजली उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। वर्तमान समय में सभी क्षेत्रों में बिजली एक अनिवार्य आवश्यकता बन गई है। राज्य सरकार बिजली की खपत बढ़ने के साथ-साथ इसके उत्पादन और संधारण पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में बिजली उत्पादन बढ़ाने के लिए नई तकनीक के साथ नई इकाइयां प्रारंभ की गई हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में देश में 360 डिग्री बदलाव आया है। जब जी20 सम्मेलन में ग्रीन और क्लीन एनर्जी का उत्पादन बढ़ाने और उपयोग का मुद्दा उठा, तो भारत दुनिया का एकमात्र देश है, जिसने 50 प्रतिशत ग्रीन एनर्जी प्रोडक्शन का लक्ष्य हासिल कर दिखाया है। यह प्रधानमंत्री मोदी की दृढ़ इच्छाशक्ति और संकल्प से ही संभव हो पाया है। कभी बिजली गुल रहने वाला मध्यप्रदेश आज बिजली फुल स्टेट बन चुका है।

हम खुद तोड़ रहे अपने रिकॉर्ड
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश ने पावर कट का लंबा दौर देखा, लेकिन अब हम नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में अपने रिकॉर्ड स्वयं तोड़ते जा रहे हैं। मध्यप्रदेश के सभी क्षेत्रों की अपनी एक अलग विशेषता है। ग्रीन गो ने नीमच-मंदसौर में 2000 मेगावॉट क्षमता का प्लांट स्थापित किया है। यह देश का सबसे अनूठा और सबसे बड़ा प्रोजेक्ट होगा। आमतौर पर इतनी बड़ी परियोजना का काम पूरा होने में 4 से 6 वर्ष लग जाते हैं, लेकिन सौभाग्य का विषय है कि मध्यप्रदेश में यह काम केवल दो से ढाई साल में पूर्ण हो रहा है। राज्य सरकार बिजली उत्पादन में आ रही सभी प्रकार की चुनौतियों को समाधान करने के लिए तत्पर है। उन्होंने कहा कि इस कार्यशाला में मंथन बिजली कंपनियों के लिए काफी उपयोगी सिद्ध होगा।
बिजली की क्षमता में हुई वृद्धि
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश के गठन से बाद से लेकर 2002-03 तक राज्य की बिजली उत्पादन क्षमता मात्र 5000 मेगावॉट थी। लेकिन आज की स्थिति में हमारी बिजली उत्पादन क्षमता 32 हजार मेगावॉट हो गई है। इसमें 30 प्रतिशत हिस्सेदारी ग्रीन एनर्जी से आती है। प्रधानमंत्री मोदी ने देश को सौर ऊर्जा की शक्ति से परिचित कराया है। देश में सौर ऊर्जा के उपयोग के कारण कार्बन उत्सर्जन में 20 करोड़ टन से अधिक गिरावट दर्ज की गई है। थर्मल पॉवर और अन्य पारंपरिक तरीकों के स्थान पर अब हम विंड, सोलर और पंप स्टोरेज से बिजली बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में अब पानी से और उसके ऊपर भी बिजली बन रही है।

योजनाओं को तेज गति से लागू कर रहा एमपी
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्वालियर-चंबल अंचल के मुरैना में स्थापित सोलर इलेक्ट्रिसिटी स्टोरेज परियोजना से सबसे सस्ती बिजली 2.70 रुपए प्रति यूनिट में मिलेगी। ऊर्जा विभाग ने तेज गति से योजनाओं को लागू करते हुए विद्युत उत्पादन क्षमता को बढ़ाया है। प्रदेश में लगभग 42 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। प्रदेश चौबीसों घंटे अक्षय ऊर्जा उत्पादन की ओर कदम बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि बिजली कंपनियां अपना घाटा कम करते हुए अपनी क्षमता बढ़ाएं। वहीं, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने वर्चुअली संबोधन में कहा कि इस कार्यशाला में हमारी विद्युत वितरण कंपनियों को ज्यादा सक्षम और सशक्त करने के लिए निचोड़ निकलेगा।