भुवनेश्वर, 8 अगस्त 2026 | भुवनेश्वर में आयोजित 13वीं BRICS शिक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान भारत और ईरान ने शिक्षा तथा विज्ञान के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। भारतीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने ईरान के कार्यवाहक विज्ञान, अनुसंधान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. मसूद शम्स-बख्श से मुलाकात की। बातचीत में दोनों देशों के पुराने सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को आधुनिक शिक्षा, शोध, प्रौद्योगिकी और नवाचार सहयोग का आधार बनाने पर जोर दिया गया।
प्रह्लाद जोशी ने जुलाई 2026 में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभाला था। वह उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालयों का प्रभार भी संभाल रहे हैं।
संस्थानों के बीच सीधा संपर्क बढ़ाने पर जोर
भारत में ईरानी दूतावास के अनुसार दोनों पक्षों ने वैज्ञानिक, शैक्षणिक और शोध संस्थानों के बीच संपर्क मजबूत करने की संभावनाओं पर विचार किया। इसमें विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और प्रौद्योगिकी केंद्रों के स्तर पर सहयोग बढ़ाने का विषय शामिल रहा। बातचीत में इस बात पर भी जोर दिया गया कि दोनों देश अपनी मौजूदा शैक्षणिक एवं वैज्ञानिक क्षमताओं का बेहतर इस्तेमाल करें। इससे संयुक्त अध्ययन, ज्ञान साझा करने और नवाचार आधारित परियोजनाओं के लिए भविष्य में नई संभावनाएं विकसित हो सकती हैं। हालांकि किसी विशेष विश्वविद्यालय साझेदारी या संयुक्त परियोजना की अभी औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।
छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए अवसर बढ़ाने पर चर्चा
द्विपक्षीय वार्ता में विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए अधिक अवसर उपलब्ध कराने का मुद्दा भी उठा। इसमें उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच संपर्क, शोध सहयोग और विशेषज्ञता साझा करने जैसे संभावित क्षेत्रों पर चर्चा हुई। यह बातचीत भविष्य में छात्र-शोधकर्ता आदान-प्रदान, संयुक्त शोध या संस्थागत भागीदारी का आधार बन सकती है। फिलहाल इसे लागू छात्रवृत्ति योजना, प्रवेश कार्यक्रम या सुनिश्चित एक्सचेंज अवसर के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि दोनों देशों ने ऐसा कोई कार्यक्रम घोषित नहीं किया है।
डिजिटल शिक्षा का बेहतर उपयोग करने पर विचार
भारत और ईरान ने डिजिटल शिक्षा की क्षमता का बेहतर उपयोग करने पर भी चर्चा की। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से पाठ्य सामग्री, शोध संसाधनों, विशेषज्ञ व्याख्यान और संस्थागत अनुभवों को साझा करने की संभावनाएं तलाशी गईं। डिजिटल शिक्षा से भौगोलिक दूरी कम करने और विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग बढ़ाने में मदद मिल सकती है। हालांकि दोनों देशों के बीच किसी साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन पाठ्यक्रम या डिग्री कार्यक्रम की घोषणा अभी नहीं की गई है।
विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार भी प्रमुख विषय
दोनों मंत्रियों ने शिक्षा के साथ विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार में सहयोग गहरा करने पर जोर दिया। बातचीत में युवाओं को सशक्त बनाने और नवाचार आधारित अवसरों को बढ़ावा देने की जरूरत पर सहमति दिखाई गई। भारत और ईरान के बीच वैज्ञानिक संस्थानों का सीधा जुड़ाव बढ़ता है तो शोधकर्ताओं को साझा परियोजनाओं, प्रशिक्षण, प्रयोगशाला सहयोग और ज्ञान-विनिमय से लाभ मिल सकता है। वास्तविक स्वरूप आगे बनने वाले समझौतों और संस्थागत निर्णयों पर निर्भर करेगा।
कोई नया MoU घोषित नहीं
द्विपक्षीय बातचीत के बाद जारी सार्वजनिक जानकारी में किसी नए समझौता ज्ञापन, छात्रवृत्ति योजना, संयुक्त विश्वविद्यालय, डिग्री मान्यता समझौते या निश्चित वित्तीय सहायता की घोषणा नहीं की गई है। इसे सहयोग की संभावनाएं तलाशने और भविष्य का एजेंडा तैयार करने वाली वार्ता के रूप में देखना अधिक तथ्यात्मक होगा। इसलिए खबर में “भारत और ईरान ने शिक्षा समझौता कर लिया” या “छात्रों के लिए एक्सचेंज प्रोग्राम शुरू” जैसी भाषा का इस्तेमाल आधिकारिक घोषणा के बिना नहीं किया जाना चाहिए।
BRICS शिक्षा मंत्रियों ने अपनाया साझा घोषणापत्र
भुवनेश्वर में संपन्न 13वीं BRICS शिक्षा मंत्रियों की बैठक में सदस्य देशों ने साझा शिक्षा घोषणापत्र अपनाया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बैठक की अध्यक्षता की और कहा कि शिक्षा को समावेशी विकास, साझा समृद्धि और भविष्य की पीढ़ियों की आकांक्षाओं से जोड़ा जाना चाहिए। बैठक भारत की 2026 BRICS अध्यक्षता के विषय “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” के तहत आयोजित हुई। इसमें भारत के अलावा ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया, ईरान, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात के मंत्री, अधिकारी एवं प्रतिनिधि शामिल हुए।
घोषणापत्र के पांच प्रमुख क्षेत्र
1. प्रारंभिक बाल देखभाल और बुनियादी शिक्षा
BRICS देशों ने Early Childhood Care and Education—ECCE के साथ Foundational Literacy and Numeracy—FLN को मजबूत करने पर सहमति जताई। इसका उद्देश्य बच्चों को गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध कराना, स्कूल में प्रवेश की तैयारी बेहतर करना और उम्र के अनुरूप डिजिटल साधनों का उपयोग बढ़ाना है।
2. कौशल विकास और TVET सहयोग
घोषणापत्र में Technical and Vocational Education and Training—TVET के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की बात कही गई है। BRICS TVET Cooperation Alliance के माध्यम से सदस्य देश कौशल प्रशिक्षण के मॉडल, टिकाऊ कौशल पहल और श्रम बाजार की जरूरतों से संबंधित अनुभव साझा करेंगे। भारत ने अंतरराष्ट्रीय कौशल-अंतर अध्ययन कराने की पहल भी रखी है, जिसमें इच्छुक BRICS देश स्वैच्छिक रूप से हिस्सा ले सकेंगे। इसका उद्देश्य भविष्य के रोजगार क्षेत्रों में जरूरी कौशल और उपलब्ध मानव संसाधन के बीच अंतर को समझना है।
3. संयुक्त शोध, नवाचार और स्टार्टअप
सदस्य देशों ने संयुक्त अनुसंधान को प्रोत्साहित करने, उच्च शिक्षण संस्थानों के बीच संपर्क मजबूत करने और स्टार्टअप इकोसिस्टम को जोड़ने पर सहमति जताई। शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सुरक्षित, नैतिक और मानव-केंद्रित उपयोग को भी महत्व दिया गया है। यह प्राथमिकता विश्वविद्यालयों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप संस्थापकों के बीच सहयोग के लिए व्यापक ढांचा उपलब्ध करा सकती है। हालांकि अलग-अलग परियोजनाओं के लिए आगे संस्थागत स्तर पर समझौते जरूरी होंगे।
4. योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता
BRICS देशों ने Mutual Recognition of Qualifications—MRQ पर काम आगे बढ़ाने के लिए संबंधित कार्य समूह की बैठकें आयोजित करने पर सहमति जताई। इसका लक्ष्य अलग-अलग देशों की शैक्षणिक योग्यताओं की मान्यता को लेकर समझ विकसित करना और अकादमिक गतिशीलता आसान बनाना है। यह व्यवस्था तत्काल लागू नहीं हुई है। इसके लिए प्रस्तावित समझौता ज्ञापन, पात्र पाठ्यक्रम, संस्थान और मान्यता प्रक्रिया पर आगे सहमति बननी होगी।
5. शैक्षणिक नेतृत्व और संस्थागत क्षमता
घोषणापत्र में विश्वविद्यालय नेतृत्व, शिक्षकों और संस्थागत प्रशासन के लिए क्षमता निर्माण बढ़ाने की बात कही गई है। BRICS Rectors’ Forum, संकाय एवं नेतृत्व आदान-प्रदान, STEM छात्रवृत्तियों और विश्वविद्यालयों के लिए संभावित BRICS वैश्विक रैंकिंग एवं मूल्यांकन प्रणाली पर आगे काम करने को प्रोत्साहित किया गया।
पारंपरिक और स्वदेशी ज्ञान पर भी फोकस
बैठक में पारंपरिक एवं स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों पर शैक्षणिक सहयोग बढ़ाने की भारत की पहल का स्वागत किया गया। BRICS Network University में इसे एक अतिरिक्त International Thematic Group के रूप में शामिल करने की संभावना पर विचार करने का सुझाव दिया गया है। इस पहल का उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान का दस्तावेजीकरण, शोध, संरक्षण और जिम्मेदार डिजिटल प्रसार बढ़ाना है। इसमें समुदाय की भागीदारी, नैतिक उपयोग और लाभ के न्यायसंगत बंटवारे को महत्वपूर्ण माना गया है।
प्रह्लाद जोशी ने क्या कहा?
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने BRICS सहयोग को जन-केंद्रित और “Humanity First” दृष्टिकोण से आगे बढ़ाने की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रणालियों को बदलती जरूरतों के अनुसार विकसित होना चाहिए और उनमें विद्यार्थी, शिक्षक, शोधकर्ता तथा युवा नीति-निर्माण के केंद्र में रहने चाहिए। उन्होंने शिक्षा को समावेशी विकास और साझा समृद्धि का आधार बताते हुए संस्थागत सहयोग, क्षमता निर्माण और ज्ञान-विनिमय बढ़ाने पर जोर दिया।
भारत-ईरान वार्ता से किसे लाभ मिल सकता है?
- विद्यार्थियों के लिए: भविष्य में शैक्षणिक साझेदारी या एक्सचेंज योजनाएं बनती हैं तो अध्ययन और अंतरराष्ट्रीय अनुभव के नए विकल्प खुल सकते हैं। अभी कोई नई प्रवेश या छात्रवृत्ति योजना लागू नहीं हुई है।
- शोधकर्ताओं के लिए: विश्वविद्यालयों और वैज्ञानिक संस्थानों के बीच संबंध मजबूत होने पर संयुक्त शोध, विशेषज्ञ प्रशिक्षण और संसाधन साझा करने के अवसर बन सकते हैं।
- उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए: डिजिटल शिक्षा, नवाचार, अकादमिक संपर्क और संयुक्त परियोजनाओं पर संस्थागत समझौते विकसित किए जा सकते हैं।
- स्टार्टअप और युवा नवप्रवर्तकों के लिए: BRICS घोषणापत्र में शोध आधारित उद्यमिता और स्टार्टअप सहयोग को प्राथमिकता मिलने से भविष्य में बहुपक्षीय मंच उपलब्ध हो सकता है।
- डिग्री धारकों के लिए: योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता पर आगे समझौता होता है तो BRICS देशों के बीच पढ़ाई और अकादमिक गतिशीलता आसान हो सकती है। फिलहाल मान्यता की वर्तमान व्यवस्था में कोई तत्काल बदलाव नहीं हुआ है।