नई दिल्ली. देश में सक्रिय मानसूनी परिस्थितियों के पीछे बंगाल की खाड़ी में विकसित कम दबाव का क्षेत्र प्रमुख कारण माना जा रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यह प्रणाली पूर्वी भारत से उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ रही है, जिसके प्रभाव से गंगा के मैदानी क्षेत्रों, उत्तर भारत और मध्य भारत में व्यापक वर्षा हो रही है। इसके साथ ही ऊपरी वायुमंडलीय चक्रवाती परिसंचरण और मानसूनी ट्रफ की सक्रिय स्थिति ने वर्षा की तीव्रता को और बढ़ा दिया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगस्त के दूसरे सप्ताह में इस प्रकार की मौसमी गतिविधियां सामान्य मानी जाती हैं, लेकिन इस बार कुछ क्षेत्रों में लगातार हो रही भारी वर्षा के कारण जलभराव, नदी-नालों के उफान और भूस्खलन जैसी स्थितियां भी सामने आ रही हैं। ऐसे में स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियां लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।
दिल्ली-एनसीआर में अभी नहीं मिलेगी पूरी राहत
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से रुक-रुक कर हो रही वर्षा ने तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज कराई है, लेकिन इसके साथ ही कई इलाकों में जलभराव और यातायात अव्यवस्था की समस्या भी बढ़ी है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार अगले चौबीस घंटों तक दिल्ली-एनसीआर में बादल छाए रहने, मध्यम से भारी वर्षा तथा कहीं-कहीं तेज बौछारें पड़ने की संभावना बनी हुई है।
मौसम विभाग का अनुमान है कि वर्तमान मौसमी प्रणाली के कमजोर पड़ने तक वर्षा का सिलसिला पूरी तरह थमने की संभावना कम है। हालांकि इसके बाद वर्षा की तीव्रता में धीरे-धीरे कमी आ सकती है। नागरिकों को जलभराव वाले क्षेत्रों से बचने और मौसम संबंधी आधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखने की सलाह दी गई है।
उत्तर प्रदेश, बिहार समेत 15 राज्यों में भारी वर्षा की चेतावनी
भारतीय मौसम विभाग ने दिल्ली-एनसीआर के अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड में अगले चौबीस घंटों के दौरान भारी वर्षा की संभावना जताई है। इन राज्यों के अनेक जिलों में तेज हवाएं चलने और आकाशीय बिजली गिरने का भी खतरा बना हुआ है।
विशेषज्ञों के अनुसार कुछ स्थानों पर हवा की गति 60 से 75 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। ऐसे मौसम में खुले स्थानों, कमजोर निर्माण वाले ढांचों तथा पेड़ों के नीचे रुकने से बचने की सलाह दी गई है। किसानों और यात्रियों को भी मौसम पूर्वानुमान के अनुसार अपनी गतिविधियों की योजना बनाने की सलाह दी गई है।
पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन और आवागमन पर असर
उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में लगातार हो रही वर्षा के कारण भूस्खलन की घटनाएं बढ़ी हैं। कई प्रमुख सड़क मार्ग मलबा आने से बाधित हो गए हैं, जिससे स्थानीय लोगों और यात्रियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उत्तराखंड के अनेक क्षेत्रों में बड़ी संख्या में सड़कें अस्थायी रूप से बंद होने की जानकारी सामने आई है।
आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार वर्षा के कारण पर्वतीय ढलानों की मिट्टी कमजोर हो जाती है, जिससे भूस्खलन की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे क्षेत्रों में यात्रा केवल अत्यंत आवश्यक होने पर ही करने तथा प्रशासन द्वारा जारी परामर्श का पालन करने की सलाह दी गई है।
हरियाणा में अगले कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण, सावधानी की अपील
हरियाणा के कई जिलों में अगले तीन से चार घंटों के दौरान भारी वर्षा और तेज हवाओं की संभावना व्यक्त की गई है। गुरुग्राम, झज्जर, जींद, रेवाड़ी, रोहतक और सोनीपत सहित आसपास के क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ तेज वर्षा हो सकती है। प्रशासन ने नागरिकों से अनावश्यक यात्रा से बचने तथा जलभराव वाले मार्गों पर विशेष सतर्कता बरतने का आग्रह किया है।
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान मानसूनी प्रणाली के सक्रिय रहने तक उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में वर्षा का दौर बना रह सकता है। ऐसे में नागरिकों के लिए मौसम विभाग की ताजा चेतावनियों पर लगातार नजर रखना और सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करना अत्यंत आवश्यक होगा।