भोपाल में रिहायशी मकानों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर नगर निगम ने सख्ती बढ़ा दी है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद अब राजधानी के अलग-अलग इलाकों में यह जांच की जा रही है कि आवासीय भवनों का इस्तेमाल नियमों के मुताबिक हो रहा है या उनमें बिना अनुमति के कमर्शियल गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। नगर निगम की ओर से शहर को 21 जोन में बांटकर विशेष सर्वे दल लगाए गए हैं। शुरुआती आकलन में करीब 1 लाख ऐसी प्रॉपर्टी सामने आई हैं, जहां रिहायशी भवनों का व्यावसायिक इस्तेमाल होने की बात सामने आई है। पहले चरण में अरेरा कॉलोनी समेत कुछ इलाकों में सर्वे और नोटिस की कार्रवाई की जा चुकी है। ऐसे में अगर आपके घर में ब्यूटी पार्लर, किराना दुकान, शोरूम या किसी तरह की दूसरी व्यावसायिक गतिविधि चल रही है, तो अब आपको भवन के इस्तेमाल और संबंधित नियमों की स्थिति जांच लेना जरूरी हो सकता है।
अरेरा कॉलोनी से शुरू हुआ सर्वे
नगर निगम ने कार्रवाई की शुरुआत राजधानी के प्रमुख रिहायशी इलाकों से की है। पहले चरण में अरेरा कॉलोनी, बावड़ियाकलां और रोहित नगर में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने वाली प्रॉपर्टीज की जांच की गई। जानकारी के मुताबिक, इन इलाकों में करीब 429 व्यावसायिक प्रॉपर्टीज को नोटिस जारी किए गए हैं। निगम की टीम ने यह पता लगाने की कोशिश की कि इन भवनों में संचालित व्यावसायिक गतिविधियां निर्धारित नियमों के अनुरूप हैं या नहीं।
दूसरे चरण में 1,250 से ज्यादा नोटिस
सर्वे का दायरा आगे बढ़ाते हुए नगर निगम ने बैरागढ़, कोलार, चुनाभट्टी, इंद्रपुरी, अशोका गार्डन और कोहेफिजा समेत कई क्षेत्रों में भी कार्रवाई की है। इन इलाकों में 1,250 से ज्यादा नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। अब नगर निगम का सर्वे शहर के दूसरे हिस्सों में भी जारी रहने वाला है। इस प्रक्रिया में केवल बड़ी दुकानों या शोरूम को ही नहीं, बल्कि रिहायशी भवनों में चल रही अलग-अलग तरह की व्यावसायिक गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।
घर में ब्यूटी पार्लर या किराना दुकान है तो क्या होगा?
इस कार्रवाई का मतलब यह नहीं है कि रिहायशी क्षेत्र में मौजूद हर दुकान या व्यावसायिक गतिविधि को तुरंत बंद कर दिया जाएगा। मुख्य सवाल यह है कि संबंधित संपत्ति का इस्तेमाल स्वीकृत भूमि उपयोग, भवन नियमों और स्थानीय प्रावधानों के अनुरूप हो रहा है या नहीं। यदि किसी भवन में व्यावसायिक गतिविधि नियमों के खिलाफ पाई जाती है, तो नगर निगम संबंधित संपत्ति के मालिक या संचालक को नोटिस जारी कर सकता है। इसलिए घर से ब्यूटी पार्लर, किराना स्टोर, ऑफिस, शोरूम या अन्य व्यवसाय संचालित करने वाले लोगों को अपने भवन से जुड़े दस्तावेज और अनुमति की स्थिति स्पष्ट रखनी होगी।
नियमों का उल्लंघन मिला तो हो सकती है कार्रवाई
नगर निगम के सर्वे के दौरान अगर किसी रिहायशी भवन में व्यावसायिक उपयोग नियमों के विपरीत पाया जाता है, तो संबंधित व्यक्ति को नोटिस दिया जा सकता है। नोटिस के बाद यदि नियमों के अनुसार जरूरी कार्रवाई नहीं की जाती है, तो नगर निगम आगे की कार्रवाई कर सकता है। इसमें गंभीर मामलों में प्रॉपर्टी सील करने की कार्रवाई भी शामिल हो सकती है। हालांकि, किसी विशेष संपत्ति पर कार्रवाई का फैसला उसकी वास्तविक स्थिति और लागू नियमों के आधार पर होगा।
101 दुकानों और शोरूम पर फिलहाल नहीं होगी दोबारा कार्रवाई
अरेरा कॉलोनी और बावड़ियाकलां में पहले करीब 101 शोरूम और दुकानों को सील किया गया था। बाद में इन प्रतिष्ठानों को दोबारा खोल दिया गया। फिलहाल नगर निगम ने इन संपत्तियों को दोबारा बंद कराने की कार्रवाई टाल दी है। निगम का कहना है कि पूरे शहर में व्यापक सर्वे के बाद वास्तविक स्थिति सामने आने पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। इसका मतलब है कि फिलहाल निगम का फोकस केवल चुनिंदा संपत्तियों पर कार्रवाई करने के बजाय पूरे शहर में व्यावसायिक गतिविधियों की स्थिति का व्यापक आकलन करने पर है।
भोपाल की करीब 1 लाख प्रॉपर्टी जांच के दायरे में
शुरुआती अनुमान के मुताबिक भोपाल में करीब 1 लाख रिहायशी प्रॉपर्टी ऐसी हो सकती हैं, जहां किसी न किसी रूप में कमर्शियल गतिविधियां संचालित हो रही हैं। नगर निगम अब सर्वे के जरिए यह सत्यापित करेगा कि इन संपत्तियों का इस्तेमाल नियमों के अनुरूप है या नहीं। सर्वे पूरा होने के बाद नियमों का उल्लंघन करने वाली संपत्तियों की पहचान कर उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
21 जोन में बनीं विशेष टीमें
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद भोपाल को 21 जोन में बांटकर विशेष सर्वे दल गठित किए गए हैं। ये टीमें रिहायशी इलाकों, कॉलोनियों और अलग-अलग मोहल्लों में जाकर भवनों के इस्तेमाल की जांच कर रही हैं। सर्वे का दायरा केवल मुख्य बाजारों तक सीमित नहीं रहेगा। टीमों को गली-मोहल्लों और बड़ी कॉलोनियों में स्थित रिहायशी भवनों की भी जांच करनी है। इसके अलावा वाटर बॉडी और ग्रीन बेल्ट से जुड़े क्षेत्रों में भी सर्वे कराया जाएगा।
प्रॉपर्टी टैक्स और भवन रिकॉर्ड से होगा मिलान
नगर निगम सर्वे के दौरान केवल मौके की स्थिति नहीं देखेगा, बल्कि उपलब्ध रिकॉर्ड से भी उसका मिलान किया जाएगा। इसमें प्रॉपर्टी टैक्स रिकॉर्ड, सड़क की चौड़ाई और भवन के स्वीकृत उपयोग जैसी जानकारियों को देखा जाएगा। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि भवन के दस्तावेजों में जिस तरह का उपयोग दर्ज है, मौके पर वास्तव में उसी तरह की गतिविधि हो रही है या नहीं। इस प्रक्रिया से नगर निगम को नियमों के उल्लंघन वाले मामलों की पहचान करने में मदद मिलेगी।
15 सितंबर तक सुप्रीम कोर्ट में देनी है रिपोर्ट
इस पूरे मामले में नगर निगम के लिए एक महत्वपूर्ण समयसीमा भी तय है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मध्य प्रदेश सरकार को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना है और भोपाल नगर निगम को 15 सितंबर तक कार्रवाई की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करनी है। यही वजह है कि राजधानी में सर्वे और रिकॉर्ड की जांच की प्रक्रिया तेज की गई है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह कार्रवाई?
रिहायशी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने से ट्रैफिक, पार्किंग, सड़क पर दबाव, सुरक्षा और आसपास रहने वाले लोगों की सुविधाओं से जुड़े सवाल भी उठते हैं। नगर निगम का यह सर्वे इस बात को स्पष्ट करने में मदद करेगा कि किन इलाकों में आवासीय संपत्तियों का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए हो रहा है और उनमें से कितनी गतिविधियां नियमों के दायरे में हैं। आगे की कार्रवाई सर्वे और दस्तावेजों की जांच के आधार पर तय की जाएगी।