इंदौर। एमपी की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले इंदौर में 22 सितंबर को ‘नो कार डे’ के तहत लोगों ने कार का इस्तेमाल छोड़कर साइकिल, दोपहिया वाहन और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का सहारा लिया। दवा उद्योग से जुड़े कारोबारियों ने भी अभियान में भागीदारी की। वहीं कलेक्टर, नगर निगम कमिश्नर और जनप्रतिनिधि भी कार छोड़कर टू-व्हीलर से अपने कार्यालय पहुंचे।
दवा उद्योग से जुड़े लोगों ने छोड़ी कार
‘नो कार डे’ के अवसर पर बेसिक ड्रग डीलर एसोसिएशन के अध्यक्ष जेपी मूलचंदानी ने दवा निर्माताओं, रॉ मैटेरियल सप्लायर और दवा उद्योग से जुड़े अन्य लोगों से कार का उपयोग नहीं करने की अपील की थी। उन्होंने एसोसिएशन के पदाधिकारियों, सदस्यों, मैनेजर, टेक्निकल स्टाफ और कर्मचारियों से भी वैकल्पिक परिवहन साधनों का इस्तेमाल करने का आग्रह किया था। जिसका असर भी दिखाई दिया।
साइकिल, टू-व्हीलर और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल
अभियान के तहत दवा उद्योग से जुड़े कारोबारियों ने चार पहिया वाहनों की जगह साइकिल, दोपहिया वाहन और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल किया। एसोसिएशन के मुताबिक, सदस्यों ने अभियान में भागीदारी कर ‘नो कार डे’ को सफल बनाने में सहयोग किया। इसके लिए अध्यक्ष जेपी मूलचंदानी ने सभी सदस्यों का आभार जताया।
अफसरों ने भी छोड़ी कार
इंदौर में ‘नो कार डे’ का असर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच भी नजर आया। कलेक्टर शिवम वर्मा, नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल, प्रभारी महापौर राजेंद्र राठौर सहित निगम के अधिकारियों ने कार के बजाय टू-व्हीलर का इस्तेमाल किया।
हेलमेट लगाकर टू-व्हीलर से निकले कलेक्टर
कलेक्टर शिवम वर्मा भी अपने बंगले से हेलमेट लगाकर टू-व्हीलर से निकले। इस दौरान उनके पीछे सुरक्षा गार्ड भी मौजूद था। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की इस पहल का उद्देश्य ‘नो कार डे’ के जरिए वैकल्पिक परिवहन साधनों को बढ़ावा देना और लोगों को कार का इस्तेमाल कम करने के लिए प्रेरित करना रहा।