नई दिल्ली | ईरान ने कथित तौर पर संकेत दिया है कि यदि अमेरिका सैन्य दबाव कम करता है और ईरानी बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी हटाता है, तो वह होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने के लिए तैयार है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा है कि ऐसी स्थिति में यह अहम समुद्री मार्ग करीब सात दिनों के भीतर खोला जा सकता है। इस खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट वास्तव में खुलता है, तो भारतीय शेयर बाजार, महंगाई, सोने-चांदी और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर इसका क्या असर पड़ सकता है।
क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?
होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को हिंद महासागर से जोड़ने वाला बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां से वैश्विक तेल और LNG व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस रास्ते पर किसी भी तरह का व्यवधान होने से कच्चे तेल की सप्लाई और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इसके उलट, अगर मार्ग सुरक्षित तरीके से दोबारा खुलता है और तेल की सप्लाई सामान्य होती है, तो बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता कम हो सकती है।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 15 सितंबर के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 10-11 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 15 सितंबर को 108.75 डॉलर प्रति बैरल बताई गई थी, जो बाद में करीब 98.27 डॉलर प्रति बैरल तक आ गई। वहीं अमेरिकी क्रूड की कीमत 15 सितंबर के 100.75 डॉलर से घटकर करीब 89.48 डॉलर प्रति बैरल बताई गई। अगर होर्मुज स्ट्रेट खुलता है और तेल की सप्लाई सामान्य होती है, तो आगे तेल की कीमतों पर दबाव कम होने की संभावना पर बाजार नजर रखेगा।
भारतीय शेयर बाजार पर क्या असर पड़ सकता है?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल सस्ता रहने से देश के इंपोर्ट बिल, चालू खाते और महंगाई पर राहत मिल सकती है। बाजार विशेषज्ञों ने भी तेल की कीमतों में गिरावट को भारतीय शेयर बाजार के लिए संभावित सकारात्मक कारक बताया है। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट खुलने से घरेलू बाजार को फायदा मिल सकता है और प्रमुख सूचकांक अपने मौजूदा कंसोलिडेशन से बाहर निकल सकते हैं। रेलिगेयर ब्रोकिंग के रिसर्च SVP अजीत मिश्रा ने भी कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट खुलने की दिशा में सकारात्मक घटनाक्रम घरेलू बाजार के लिए मददगार हो सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि बाजार में लगातार तेजी के लिए कच्चे तेल की कीमतों का 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे और अपेक्षाकृत स्थिर रहना महत्वपूर्ण होगा। ये विशेषज्ञों के बाजार संबंधी आकलन हैं, निश्चित भविष्यवाणी नहीं।
सोने की कीमतों पर क्या असर?
सोने पर इसका असर थोड़ा अलग तरीके से पड़ सकता है। अगर तेल की कीमतों में गिरावट से महंगाई का दबाव कम होता है, तो केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीति को लेकर बाजार की चिंताएं बदल सकती हैं। सेबी-रजिस्टर्ड रिसर्च एनालिस्ट अनुज गुप्ता के मुताबिक, तेल की कीमतों में गिरावट से ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका कम हो सकती है, जिसका असर सोने की कीमतों पर पड़ सकता है। उन्होंने MCX पर सोने के लिए ₹1.53 लाख से ₹1.54 लाख प्रति 10 ग्राम का स्तर बताया है। वहीं, भू-राजनीतिक घटनाक्रम के कारण सोने में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना भी बताई गई है। इसलिए होर्मुज स्ट्रेट खुलने का असर केवल तेल की कीमतों पर निर्भर नहीं करेगा, बल्कि अमेरिका-ईरान तनाव, डॉलर और वैश्विक ब्याज दरों जैसे अन्य कारक भी महत्वपूर्ण रहेंगे।
चांदी पर भी पड़ेगा असर?
चांदी की कीमतें भी वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और निवेश मांग से प्रभावित होती हैं। यदि तेल की कीमतों में स्थिरता आती है और महंगाई को लेकर दबाव घटता है, तो कीमती धातुओं के बाजार में उतार-चढ़ाव का पैटर्न बदल सकता है। हालांकि, चांदी पर औद्योगिक मांग का भी महत्वपूर्ण प्रभाव होता है। इसलिए केवल होर्मुज स्ट्रेट खुलने के आधार पर चांदी की कीमत की दिशा तय करना उचित नहीं होगा।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है सस्ता तेल?
भारत दुनिया के बड़े कच्चे तेल आयातकों में शामिल है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में लंबे समय तक गिरावट रहने पर भारतीय अर्थव्यवस्था को कई स्तरों पर राहत मिल सकती है।
संभावित प्रभावों में:
- आयात बिल में कमी
- महंगाई के दबाव में राहत
- चालू खाते पर सकारात्मक असर
- कंपनियों की लागत में कमी
- परिवहन और लॉजिस्टिक्स लागत पर संभावित राहत
- तेल आयात करने वाली अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर बाहरी संतुलन
हालांकि, घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तत्काल और समान अनुपात में बदलाव होना जरूरी नहीं है। इसका असर घरेलू टैक्स, सरकारी नीतियों, रुपये की विनिमय दर और तेल कंपनियों की मूल्य निर्धारण व्यवस्था समेत कई कारकों पर निर्भर करेगा।
सबसे बड़ा जोखिम अभी भी भू-राजनीतिक तनाव
होर्मुज स्ट्रेट खोलने की खबर बाजार के लिए राहत देने वाली हो सकती है, लेकिन यह ईरान-अमेरिका संबंधों में आगे होने वाले घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने अमेरिका के सामने कुछ शर्तों के साथ स्ट्रेट खोलने का प्रस्ताव रखा है। इसलिए जब तक दोनों पक्षों के बीच कोई ठोस समझौता और उसके बाद वास्तविक रूप से समुद्री यातायात सामान्य नहीं होता, तब तक तेल और शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों के लिए मुख्य बात: होर्मुज स्ट्रेट खुलने की स्थिति में कच्चे तेल की कीमत, रुपये की चाल, महंगाई के आंकड़े और वैश्विक केंद्रीय बैंकों की नीति बाजार की दिशा समझने के लिए महत्वपूर्ण संकेतक होंगे।