लखनऊ - समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के एक बयान को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने लाभार्थियों की पहचान और सरकारी योजनाओं के भुगतान के लिए वोटर आईडी (EPIC नंबर) को आधार बनाने से जुड़े बयान पर सवाल उठाए हैं। अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए पूछा कि अगर सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए वोटर आईडी जरूरी है, तो उन बच्चों का क्या होगा, जो अभी मतदान करने की उम्र तक नहीं पहुंचे हैं। उन्होंने भाजपा पर चुनाव जीतने के लिए गलत तरीके अपनाने की साजिश रचने का आरोप भी लगाया है।
ललन सिंह के बयान से शुरू हुआ राजनीतिक विवाद
दरअसल, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने एक कार्यक्रम के दौरान लाभार्थियों की पहचान को लेकर अपनी बात रखी थी। उन्होंने कहा था कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेने वाले लोगों के लिए अब केवल आधार कार्ड पर्याप्त नहीं होगा। लाभार्थियों की पहचान के लिए बायोमेट्रिक जानकारी और वोटर आईडी का ईपीआईसी नंबर आधार के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा था कि इसी पहचान के आधार पर लाभार्थियों को भुगतान किया जाएगा।
ललन सिंह के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई। विपक्षी दलों ने इस व्यवस्था को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए। इसी कड़ी में अखिलेश यादव ने भी सोशल मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी और सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए।
अखिलेश यादव ने मिड-डे मील योजना का दिया उदाहरण
अखिलेश यादव ने अपने बयान में बच्चों को मिलने वाले मिड-डे मील का उदाहरण देते हुए केंद्रीय मंत्री से स्पष्टीकरण मांगा। उन्होंने कहा कि अगर सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए वोटर आईडी या ईपीआईसी नंबर जरूरी कर दिया जाएगा, तो उन बच्चों का क्या होगा, जो अभी वयस्क नहीं हुए हैं और जिनके पास वोटर आईडी नहीं है।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ऐसे बच्चों को स्कूलों में मिड-डे मील का खाना भी नहीं दिया जाएगा? अखिलेश के मुताबिक, मिड-डे मील जैसी योजनाएं भी लाभार्थियों के लिए चलाई जाती हैं, लेकिन इनका फायदा उठाने वाले बच्चों के पास मतदान पहचान पत्र नहीं होता। इस उदाहरण के जरिए उन्होंने सरकारी योजनाओं में पहचान संबंधी नियमों को लेकर संभावित परेशानियों की ओर ध्यान दिलाने की कोशिश की।
यूपी के 1 करोड़ 27 लाख वोटरों का भी किया जिक्र
सपा प्रमुख ने अपने बयान में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से बताए गए आंकड़ों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 1 करोड़ 27 लाख बहुसंख्यक वोटर हैं। अखिलेश ने सवाल उठाया कि यदि लाभार्थी योजनाओं के लिए वोटर आईडी को अनिवार्य आधार बनाया जाता है, तो इन लोगों की पात्रता और सरकारी योजनाओं से जुड़े लाभ पर क्या असर पड़ेगा। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी ने अपने पारंपरिक समर्थकों का भी भरोसा खो दिया है। इसी वजह से वह चुनाव जीतने के लिए नए तरीके अपना रही है।
'वोट से नहीं, खोट से चुनाव जीतना चाहती है भाजपा'
अखिलेश यादव ने अपने बयान में भाजपा पर सबसे तीखा हमला चुनावी प्रक्रिया को लेकर किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अब जनता के समर्थन के बजाय गलत तरीकों के सहारे चुनाव जीतने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा 'वोट' से नहीं, बल्कि 'खोट' से चुनाव जीतने की बड़ी साजिश में लगी हुई है। उनके इस बयान को आगामी चुनावों और मतदाता पहचान से जुड़े मुद्दों के बीच विपक्ष की राजनीतिक रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।
लाभार्थियों की पहचान का मुद्दा बना राजनीतिक बहस का विषय
ललन सिंह के बयान और अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया के बाद सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान का मुद्दा चर्चा में आ गया है। एक तरफ केंद्रीय मंत्री ने बायोमेट्रिक और ईपीआईसी नंबर के जरिए लाभार्थियों की पहचान तथा भुगतान की बात कही है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इस व्यवस्था को लेकर सवाल उठा रहा है।
फिलहाल इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज होती दिखाई दे रही है। आने वाले दिनों में केंद्र सरकार या संबंधित मंत्रालय की ओर से इस व्यवस्था को लेकर कोई विस्तृत स्पष्टीकरण सामने आता है या नहीं, इस पर भी नजर होगी