नई दिल्ली - पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की मात्रा को लेकर देश में नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने E20 पेट्रोल की बिक्री को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कर्नाटक सरकार की ओर से पेट्रोल के नमूनों की जांच के नतीजों का हवाला देते हुए दावा किया कि कई जगहों पर पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा निर्धारित 20 प्रतिशत से अधिक पाई गई है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर तंज कसते हुए लिखा, 'E20 बना 420 - जनता की गाड़ी से पेट्रोल चोरी!' उन्होंने केंद्र सरकार से देशभर में बिक रहे पेट्रोल में इथेनॉल की वास्तविक मात्रा सार्वजनिक करने की मांग की है।
राहुल गांधी ने 'E20 बना 420' कहकर साधा निशाना
राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में केंद्र सरकार की इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने '420' शब्द का इस्तेमाल करते हुए पूर्ववर्ती भारतीय दंड संहिता की धारा 420 की ओर इशारा किया, जो धोखाधड़ी से संबंधित थी।
राहुल गांधी का कहना है कि सरकार की ओर से पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने की बात कही जाती है, लेकिन कर्नाटक में कराई गई जांच के परिणाम कुछ और ही तस्वीर पेश करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्धारित सीमा से अधिक इथेनॉल मिलने के बावजूद उपभोक्ताओं को इसकी सही जानकारी नहीं दी जा रही है।
कर्नाटक में 14 नमूनों की जांच, 11 में 20% से ज्यादा इथेनॉल
राहुल गांधी ने कर्नाटक सरकार की ओर से कराए गए परीक्षण का हवाला देते हुए बताया कि राज्य के सात जिलों से पेट्रोल के नमूने एकत्र किए गए थे। इनकी जांच मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में कराई गई। उन्होंने दावा किया कि कुल 14 नमूनों में से 11 में इथेनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई। उनके अनुसार, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) के एक नमूने में इथेनॉल की मात्रा 31.2 प्रतिशत और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) के नमूने में 30.5 प्रतिशत पाई गई।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम, नयारा और शेल जैसी सरकारी तथा निजी कंपनियों के पेट्रोल में निर्धारित सीमा से अधिक इथेनॉल मिला हुआ था। उन्होंने यह भी दावा किया कि कंपनियों की अपनी प्रयोगशालाओं की रिपोर्ट में इथेनॉल की वास्तविक मात्रा स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं की गई।
गाड़ी की माइलेज और प्रदर्शन पर पड़ने का खतरा
राहुल गांधी ने पेट्रोल में अधिक मात्रा में इथेनॉल मिलाने के संभावित प्रभावों को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि निर्धारित अनुपात से अधिक इथेनॉल होने पर वाहनों की चालन क्षमता और प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है। उन्होंने पेट्रोल पंपों पर भी सवाल उठाए। राहुल गांधी के मुताबिक, ग्राहकों को यह जानकारी नहीं दी जा रही है कि उन्हें मिलने वाले पेट्रोल में वास्तव में कितनी मात्रा में इथेनॉल मौजूद है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया कि देशभर में पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं की गाड़ियों में आखिर किस अनुपात वाला ईंधन भरा जा रहा है। उन्होंने यह भी पूछा कि यदि कंपनियां निर्धारित सीमा से अधिक इथेनॉल मिला रही हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई कब होगी।
कर्नाटक सरकार ने सात जिलों से जुटाए थे नमूने
यह पूरा विवाद कर्नाटक सरकार की ओर से लगाए गए आरोपों के बाद सामने आया है। राज्य के खाद्य, नागरिक आपूर्ति, उपभोक्ता मामले और कानूनी माप विज्ञान मंत्री रिजवान अरशद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पेट्रोल के नमूनों की जांच से जुड़ी जानकारी साझा की थी। उनके मुताबिक, राज्य के सात जिलों से नमूने एकत्र किए गए थे। इनमें बेंगलुरु, कोलार, चिक्काबल्लापुर, बेंगलुरु ग्रामीण, रामनगर, मंगलुरु और तुमकुरु शामिल हैं।
कर्नाटक सरकार ने आरोप लगाया कि प्रमुख तेल विपणन कंपनियां निर्धारित 20 प्रतिशत की सीमा से अधिक इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की आपूर्ति कर रही हैं। जांच में कुछ नमूनों में इथेनॉल की मात्रा 31.2 प्रतिशत तक दर्ज होने का दावा किया गया। राज्य सरकार ने इस मामले में संबंधित कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
मोदी को फिर दी खुली बहस की चुनौती
राहुल गांधी ने पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा का मुद्दा उठाने के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक बार फिर खुली बहस की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि इस बहस में E20 पेट्रोल और उससे जुड़े सवालों को भी शामिल किया जा सकता है। उनका कहना है कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि देश में बिकने वाले पेट्रोल में वास्तव में कितनी मात्रा में इथेनॉल मिलाया जा रहा है और यदि निर्धारित सीमा का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार कंपनियों पर क्या कार्रवाई की जाएगी।
E20 पेट्रोल को लेकर बढ़ सकती है राजनीतिक बहस
केंद्र सरकार की इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल नीति का उद्देश्य पारंपरिक पेट्रोल पर निर्भरता कम करना और वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देना है। हालांकि, अब कर्नाटक में सामने आए जांच के दावों ने इस नीति के क्रियान्वयन और उपभोक्ताओं को मिलने वाली जानकारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल राहुल गांधी के आरोपों और कर्नाटक सरकार की ओर से पेश किए गए परीक्षण परिणामों के बीच केंद्र सरकार तथा संबंधित तेल कंपनियों का विस्तृत पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा। जांच के दावों की आधिकारिक पुष्टि और कंपनियों की प्रतिक्रिया से ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।