मथुरा - बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान को लेकर शुरू हुआ विवाद अब और गहराता जा रहा है। इस मामले में अब संत समाज और धर्माचार्य खुलकर उनके समर्थन में आ गए हैं। उत्तर प्रदेश के वृंदावन में संतों और कथावाचकों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान का समर्थन करते हुए उनके खिलाफ हो रही आलोचनाओं पर नाराजगी जताई गई। बैठक में शामिल संतों ने एकजुट होकर 'संतों का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान' का नारा लगाया। धर्माचार्यों का कहना है कि धीरेंद्र शास्त्री की बात को उसके वास्तविक संदर्भ से अलग करके पेश किया जा रहा है और सनातन धर्म से जुड़े लोगों को अनावश्यक विवादों में घसीटा जा रहा है।
वृंदावन की बैठक में संतों ने किया धीरेंद्र शास्त्री का समर्थन
वृंदावन में हुई इस बैठक में कई संतों, कथावाचकों और धर्माचार्यों ने हिस्सा लिया। सभी ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि किसी भी धार्मिक वक्तव्य का मूल्यांकन करने से पहले उसके पीछे की भावना और संदर्भ को समझना जरूरी है।
बैठक में संतों ने भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के अवतारों के उद्देश्य का उल्लेख किया। उनका कहना था कि भगवान श्रीराम का अवतार मर्यादा और आदर्श जीवन की स्थापना के लिए हुआ था, जबकि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का स्वरूप अलग था। इसलिए दोनों के जीवन प्रसंगों और धार्मिक भावों में अंतर होना स्वाभाविक है। धर्माचार्यों ने आरोप लगाया कि कुछ लोग धीरेंद्र शास्त्री की बात का पूरा अर्थ समझे बिना ही उनका विरोध कर रहे हैं। संत समाज ने स्पष्ट किया कि वह इस मामले में उनके साथ खड़ा है।
कार्ष्णि नागेंद्र जी महाराज ने जताई नाराजगी
बैठक में कार्ष्णि नागेंद्र जी महाराज, प्रभारी काशी विद्वत्परिषद पश्चिमी भारत ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि सनातन धर्म और उससे जुड़े संतों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। उनका कहना था कि संत, ऋषि-मुनि और धर्माचार्य समाज में धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को आगे बढ़ाने का काम करते हैं। इसके बावजूद उनके बयानों को लेकर विवाद खड़ा किया जाता है और उनकी छवि खराब करने का प्रयास होता है।
नागेंद्र जी महाराज ने कहा कि संतों, कथावाचकों और ब्राह्मणों के सम्मान के साथ किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि संत समाज की नाराजगी का प्रभाव आने वाले चुनावों में देखने को मिल सकता है।
संजीव कृष्ण ने अखिलेश यादव पर उठाए सवाल
इस बैठक में कथावाचक संजीव कृष्ण ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि यदि अखिलेश यादव वास्तव में भगवान श्रीकृष्ण और सनातन धर्म के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करना चाहते हैं, तो उन्हें मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि से जुड़े मुद्दे पर भी खुलकर अभियान चलाना चाहिए।
संजीव कृष्ण ने कृष्ण जन्मभूमि परिसर में स्थित मस्जिद को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक लाभ और मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति के चलते संतों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संत समाज धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के पीछे मजबूती से खड़ा है और उनके सम्मान के मुद्दे पर एकजुट रहेगा।
ठाकुर कृष्ण चंद्र शास्त्री ने भी दिया समर्थन
प्रसिद्ध कथावाचक ठाकुर कृष्ण चंद्र शास्त्री ने भी धीरेंद्र शास्त्री के समर्थन में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि ब्रज क्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण की अलग-अलग भावनाओं और परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना की जाती है। ऐसे में कृष्ण से जुड़े धार्मिक प्रसंगों और भावों को समझने के लिए उनकी परंपराओं का ज्ञान होना जरूरी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग केवल टीआरपी और सोशल मीडिया पर व्यूज हासिल करने के लिए धार्मिक विषयों को विवाद का रूप दे रहे हैं। कृष्ण चंद्र शास्त्री ने साफ किया कि संत समाज इस पूरे मामले में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के साथ खड़ा है।
बयान पर विवाद के बीच एकजुट हुआ संत समाज
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान को लेकर शुरू हुआ विवाद अब धार्मिक और राजनीतिक चर्चाओं का विषय बन गया है। एक तरफ उनके बयान की आलोचना हो रही है, वहीं दूसरी ओर वृंदावन में हुई बैठक के जरिए संत समाज ने उनके समर्थन में एकजुटता दिखाई है।
बैठक में उठे मुद्दों से यह भी स्पष्ट है कि मामला अब केवल एक बयान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें सनातन धर्म, संतों के सम्मान और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं जैसे विषय भी जुड़ गए हैं। आने वाले दिनों में इस विवाद पर राजनीतिक दलों और अन्य धर्माचार्यों की प्रतिक्रियाएं भी महत्वपूर्ण हो सकती हैं।