भोपाल | मध्य प्रदेश के सागर जिले की बीना विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता पर फैसला विधानसभा के शीतकालीन सत्र के बाद आ सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की याचिका पर विधानसभा अध्यक्ष को दलबदल से जुड़े मामले में दो महीने के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। मध्य प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र 7 से 11 दिसंबर तक प्रस्तावित है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि सत्र समाप्त होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष इस मामले में फैसला सुना सकते हैं।
भाजपा के मंच पर नजर आने के बाद शुरू हुआ विवाद
निर्मला सप्रे ने विधानसभा चुनाव कांग्रेस के टिकट पर लड़ा था। हालांकि, लोकसभा चुनाव के दौरान करीब चार महीने बाद वह मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ भाजपा के मंच पर नजर आई थीं। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने उन पर दलबदल का आरोप लगाते हुए विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के सामने उनकी सदस्यता समाप्त करने की मांग की थी। इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष आवेदन दिया गया, लेकिन प्रकरण बाद में हाई कोर्ट पहुंच गया।
सुप्रीम कोर्ट ने दो महीने में फैसला लेने के दिए निर्देश
उमंग सिंघार ने हाई कोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें विधानसभा अध्यक्ष को मामले के निपटारे के लिए समयसीमा में बांधने से इनकार किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए विधानसभा अध्यक्ष को दो महीने के भीतर दलबदल संबंधी मामले का निराकरण करने का निर्देश दिया है।
दोनों पक्ष रख चुके हैं अपना पक्ष
विधानसभा सचिवालय के अधिकारियों के अनुसार, दलबदल के आरोपों से जुड़े मामले में साक्ष्य लिए जा चुके हैं और दोनों पक्ष अपनी बात रख चुके हैं। चूंकि विधानसभा का शीतकालीन सत्र पहले ही अधिसूचित हो चुका है, इसलिए माना जा रहा है कि इस मामले में फैसला सत्र समाप्त होने के बाद सुनाया जा सकता है। अब सभी की नजरें विधानसभा अध्यक्ष के निर्णय पर टिकी हैं, जिससे निर्मला सप्रे की विधायकी को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।