सिलीगुड़ी: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि आज के दौर में युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब दुश्मन केवल सीमा पर ही चुनौती नहीं दे रहे, बल्कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके भी लोगों के बीच भ्रम और गलत सूचनाएं फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा के लिए बदलती चुनौतियों को समझना और उनके प्रति सतर्क रहना बेहद जरूरी है।
सिलीगुड़ी में अपने संबोधन के दौरान रक्षा मंत्री ने आधुनिक युद्ध की बदलती रणनीतियों और सूचना के जरिए पैदा होने वाले खतरों की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने संकेत दिया कि आज किसी देश को कमजोर करने के लिए केवल सैन्य ताकत का इस्तेमाल ही जरूरी नहीं है। गलत सूचनाओं, भ्रामक संदेशों और सोशल मीडिया पर चलाए जाने वाले अभियानों के जरिए भी समाज में असमंजस और अविश्वास पैदा किया जा सकता है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म भी बन रहे हैं युद्ध का मैदान
राजनाथ सिंह के मुताबिक, आधुनिक समय में युद्ध का दायरा पारंपरिक सीमाओं से काफी आगे बढ़ चुका है। अब साइबर स्पेस और डिजिटल माध्यम भी सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण हो गए हैं। दुश्मन ताकतें सोशल मीडिया के जरिए फर्जी खबरें और भ्रामक सूचनाएं फैलाकर लोगों की सोच को प्रभावित करने का प्रयास कर सकती हैं।
ऐसे में केवल सीमाओं की सुरक्षा करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सूचना के क्षेत्र में भी देश को मजबूत और सतर्क रहना होगा। सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली हर जानकारी पर आंख मूंदकर भरोसा करने के बजाय उसकी सत्यता की जांच करना भी जरूरी है।
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सतर्कता जरूरी
रक्षा मंत्री ने बदलते सुरक्षा परिदृश्य के बीच देश की सामूहिक जिम्मेदारी पर भी जोर दिया। आधुनिक दौर में तकनीक का इस्तेमाल जितनी तेजी से बढ़ रहा है, उतनी ही तेजी से उससे जुड़े खतरे भी सामने आ रहे हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों के साथ-साथ आम नागरिकों की जागरूकता भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
गौरतलब है कि राजनाथ सिंह पहले भी राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में दुष्प्रचार और अफवाहों को गंभीर चुनौती बता चुके हैं। उनका मानना रहा है कि गलत सूचनाएं समाज में अस्थिरता पैदा कर सकती हैं और संवेदनशील मुद्दों पर जिम्मेदार जानकारी लोगों तक पहुंचना जरूरी है।
पारंपरिक युद्ध से आगे बढ़ चुकी है दुनिया
आधुनिक युद्ध में ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर हमले और डिजिटल माध्यमों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। अब किसी भी देश की सुरक्षा का आकलन केवल उसकी सीमाओं और सैन्य क्षमता से नहीं किया जा सकता। तकनीकी तैयारी, सूचना की सुरक्षा और नागरिकों की जागरूकता भी राष्ट्रीय सुरक्षा का अहम हिस्सा बन चुकी है।
राजनाथ सिंह का यह संदेश ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब दुनिया भर में डिजिटल माध्यमों के जरिए दुष्प्रचार और भ्रामक सूचनाओं का इस्तेमाल सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के रूप में सामने आ रहा है।