ग्वालियर | मध्य प्रदेश में पुरानी पेंशन योजना (OPS) की मांग कर रहे हजारों शिक्षकों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। ग्वालियर हाईकोर्ट ने शिक्षाकर्मियों की पिछली सेवा, वरिष्ठता और पेंशन से जुड़े मामले में अहम फैसला सुनाया है। फैसले के मुताबिक, यदि सरकार शिक्षकों की पुरानी सेवाओं को मान्यता देकर उन्हें क्रमोन्नति और वरिष्ठता का लाभ दे रही है, तो उन्हें पुरानी पेंशन योजना के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। इस निर्णय से वर्ष 1998 से 2005 के बीच पंचायत और नगरीय निकायों के माध्यम से नियुक्त करीब 99 हजार से अधिक अध्यापकों और शिक्षकों के लिए पुरानी पेंशन का रास्ता खुलने की संभावना जताई जा रही है।
नई नियुक्ति मानने की सरकार की दलील खारिज
मामले में राज्य सरकार की ओर से तर्क दिया गया था कि वर्ष 2018 में नवीन शैक्षणिक संवर्ग में संविलियन के बाद शिक्षकों को नई नियुक्ति माना जाना चाहिए। इसी आधार पर उन्हें पुरानी पेंशन योजना के दायरे से बाहर रखा जा रहा था। हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने माना कि शिक्षकों की सेवा की निरंतरता उनकी मूल नियुक्ति से जुड़ी हुई है। ऐसे में केवल संविलियन के आधार पर उनकी पुरानी सेवा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
1 जनवरी 2005 की नियुक्ति तिथि का विवाद
मध्य प्रदेश में 1 जनवरी 2005 के बाद नियुक्त कर्मचारियों के लिए नई पेंशन योजना (NPS) लागू की गई थी। शिक्षकों का पक्ष यह रहा कि उनकी मूल नियुक्ति वर्ष 1998 से 2001 या 2003 के बीच शिक्षाकर्मी के रूप में हुई थी। हाईकोर्ट के फैसले में मूल नियुक्ति की तारीख और सेवा की निरंतरता को अहम माना गया है। इसी आधार पर इन शिक्षकों को 2005 से पहले नियुक्त कर्मचारियों के रूप में पुरानी पेंशन का लाभ देने का रास्ता बन सकता है।
99 हजार से अधिक शिक्षकों को मिल सकता है लाभ
इस फैसले से पंचायत और नगरीय निकायों के माध्यम से नियुक्त लगभग 99 हजार से अधिक अध्यापकों और शिक्षकों को संभावित लाभ मिल सकता है। लंबे समय से पुरानी पेंशन की मांग कर रहे शिक्षकों के लिए इसे महत्वपूर्ण कानूनी राहत माना जा रहा है।
वरिष्ठता और क्रमोन्नति के लाभ पर कोर्ट की अहम टिप्पणी
मामले का मुख्य आधार यह है कि जब सरकार शिक्षकों की पिछली सेवा को जोड़कर वरिष्ठता और क्रमोन्नति का लाभ दे रही है, तो उसी सेवा अवधि को पेंशन की पात्रता तय करते समय नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। इस फैसले के बाद प्रदेश के शिक्षा और प्रशासनिक विभागों में इसके संभावित प्रभाव को लेकर चर्चा तेज होने की उम्मीद है। हालांकि, सभी पात्र शिक्षकों को पेंशन का वास्तविक लाभ मिलने के लिए आदेश के क्रियान्वयन और संबंधित विभागीय प्रक्रिया की स्थिति महत्वपूर्ण होगी।