कोलकाता डेस्क: पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कुछ मालवाहक जहाजों की कंपनियां अब यमन के हूती विद्रोहियों से ई-मेल के जरिए संपर्क कर रही हैं। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि समुद्री रास्ते से गुजरते समय उनके जहाजों को निशाना न बनाया जाए।
दरअसल, हूती विद्रोहियों ने समुद्री जहाजों की आवाजाही पर अपनी ओर से कुछ प्रतिबंध लगाए हैं। ऐसे में कई शिपिंग कंपनियां जोखिम उठाने के बजाय पहले ही हूती संगठन से संपर्क कर अपने जहाज और यात्रा से जुड़ी जानकारी साझा कर रही हैं। यह व्यवस्था किसी अंतरराष्ट्रीय समुद्री संस्था की ओर से मान्यता प्राप्त नहीं है, लेकिन मौजूदा हालात में कुछ कंपनियां इसे सुरक्षा के अतिरिक्त उपाय के तौर पर अपना रही हैं।
ई-मेल के जरिए कैसे मिल रही है सुरक्षा की जानकारी?
इस पूरी प्रक्रिया में हूती विद्रोहियों के नियंत्रण वाले 'ह्यूमैनिटेरियन ऑपरेशंस कोऑर्डिनेशन सेंटर' (HOCC) की अहम भूमिका है। इस केंद्र की स्थापना 2024 की शुरुआत में की गई थी। यह संगठन हूती नेतृत्व और समुद्री परिवहन कंपनियों के बीच संपर्क का माध्यम बनता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, शिपिंग कंपनियां ई-मेल के जरिए जहाज का नाम, चालक दल से जुड़ी जानकारी और यात्रा का संभावित कार्यक्रम साझा करती हैं। इसके साथ ही कंपनियां यह भी बताती हैं कि उनके जहाज या चालक दल का इजरायल, अमेरिका और ब्रिटेन से कोई संबंध नहीं है। कुछ मामलों में हूती पक्ष की ओर से करीब 24 घंटे के भीतर जवाब दिया जाता है। इस जवाब के जरिए जहाज को बताया जाता है कि उसे संभावित निशाने के तौर पर देखा जा रहा है या नहीं।
चीनी मालवाहक जहाज को मिला एक सप्ताह का परमिट
इस व्यवस्था का एक उदाहरण चीनी कंटेनर जहाज 'झोंग चेंग चांग लिंग' के मामले में सामने आया है। सितंबर 2026 में जहाज की प्रबंधन कंपनी ने हूती संगठन से संपर्क कर सुरक्षित आवाजाही को लेकर जानकारी मांगी थी। इसके बाद जहाज को एक सप्ताह का परमिट दिया गया।
बताया गया है कि हूती पक्ष ने जहाज को यात्रा के दौरान अपना ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) चालू रखने का निर्देश दिया था। इस सिस्टम के जरिए जहाज की पहचान, उसकी स्थिति, गति और गंतव्य की जानकारी प्रसारित होती है। इसके अलावा समुद्री आपातकालीन संचार के लिए इस्तेमाल होने वाले VHF चैनल-16 को भी चालू रखने को कहा गया था।
इसके बाद जहाज ने बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से होते हुए लाल सागर का रास्ता पार किया और 11 सितंबर को हिंद महासागर में पहुंच गया।
अंतरराष्ट्रीय समुद्री एजेंसियों ने दी सावधानी बरतने की सलाह
हालांकि, हूती विद्रोहियों से सीधे संपर्क करने की इस व्यवस्था को लेकर सुरक्षा और कानूनी चिंताएं भी हैं। अंतरराष्ट्रीय समुद्री अधिकारियों ने जहाजों को HOCC के साथ पंजीकरण करने या उससे सीधे संपर्क करने से बचने की सलाह दी है। उनका मानना है कि किसी सशस्त्र संगठन के साथ संवाद करना अपने आप में सुरक्षा संबंधी जोखिम पैदा कर सकता है।
यही वजह है कि सभी शिपिंग कंपनियां इस तरीके को नहीं अपना रही हैं। कई कंपनियां लाल सागर के जोखिम भरे रास्ते से गुजरने के बजाय दूसरे समुद्री मार्गों को प्राथमिकता दे रही हैं।
सऊदी अरब की नाकेबंदी के बाद बढ़ी चिंता
लाल सागर में मौजूदा तनाव के पीछे जुलाई 2026 में हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब के खिलाफ घोषित समुद्री नाकेबंदी भी एक बड़ी वजह है। हूती संगठन ने सऊदी बंदरगाहों से जुड़े जहाजों और सऊदी माल ले जाने वाले पोतों को निशाना बनाने की चेतावनी दी थी।
इस घटनाक्रम ने बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य को लेकर चिंता बढ़ा दी है। यह जलमार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और स्वेज नहर के रास्ते एशिया तथा यूरोप के बीच होने वाले व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यहां किसी भी तरह का व्यवधान जहाजों की आवाजाही, माल की आपूर्ति और वैश्विक व्यापार की लागत को प्रभावित कर सकता है।
कुल मिलाकर, लाल सागर में सुरक्षा की स्थिति ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों को असामान्य कदम उठाने के लिए मजबूर कर दिया है। अब समुद्र में सुरक्षित यात्रा के लिए कुछ कंपनियां उसी संगठन से ई-मेल के जरिए आश्वासन मांग रही हैं, जिसके हमलों का उन्हें डर है।