नई दिल्ली - कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी इन दिनों अपनी आने वाली आत्मकथा 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव' (Belonging: A Journey of Love) को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी। इस मौके पर उन्होंने अपनी ऑटोबायोग्राफी की पहली झलक साझा करते हुए एक वीडियो पोस्ट किया था।
अब एक इंटरव्यू में सोनिया गांधी ने देश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों, लोकतांत्रिक संस्थाओं, कांग्रेस की चुनौतियों और विपक्ष की भूमिका को लेकर खुलकर अपनी राय रखी है। उन्होंने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में देश के लोकतांत्रिक ढांचे, संवैधानिक संस्थाओं और सामाजिक एकता को गहरा नुकसान पहुंचा है।
मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल पर उठाए सवाल
अंग्रेजी अखबार 'द हिंदू' को दिए इंटरव्यू में सोनिया गांधी ने कहा कि पिछले 12 वर्षों के दौरान देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और संस्थाओं की स्थिति प्रभावित हुई है। उनके अनुसार, इसका असर अब आम लोगों को भी महसूस होने लगा है। लोगों के बीच मौजूदा परिस्थितियों को लेकर चिंता और बेचैनी बढ़ रही है।
सोनिया गांधी का आरोप है कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी संस्थाओं और सामाजिक ताने-बाने को कमजोर किया गया है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना केवल किसी एक राजनीतिक दल की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे देश और राजनीतिक व्यवस्था की सामूहिक जिम्मेदारी है।
सरकार बदलने के बाद भी आसान नहीं होगी लोकतांत्रिक व्यवस्था की बहाली
सोनिया गांधी ने देश के भविष्य को लेकर उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यदि सत्ता परिवर्तन होता है तो देश में बेहतर शासन व्यवस्था की वापसी संभव है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार बदलने भर से सभी समस्याओं का समाधान नहीं हो जाएगा।
उनके मुताबिक, लोकतांत्रिक संस्थाओं को दोबारा मजबूत बनाने और उनकी विश्वसनीयता बहाल करने में समय लगेगा। इसके लिए सभी राजनीतिक दलों को मिलकर गंभीर प्रयास करने होंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि देश की जनता सुशासन और मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था का स्वागत करेगी।
कांग्रेस को नहीं मिल रहे चुनाव लड़ने के समान अवसर
इंटरव्यू के दौरान सोनिया गांधी ने कांग्रेस की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और विपक्ष के सामने मौजूद चुनौतियों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि मौजूदा केंद्र सरकार के कार्यकाल में विपक्षी दलों को चुनाव लड़ने के लिए बराबरी का अवसर नहीं मिल पा रहा है।
सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग सहित विभिन्न संस्थाओं पर सरकार का प्रभाव है। इसके अलावा उन्होंने मुख्यधारा के मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि चुनावी मुकाबले में धनबल और धर्म का इस्तेमाल भी राजनीतिक परिस्थितियों को प्रभावित कर रहा है।
इन चुनौतियों के बावजूद उन्होंने कांग्रेस के संघर्ष को महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, पार्टी के नेता और कार्यकर्ता लगातार मुश्किल परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। कई स्तरों पर दबाव और चुनौतियां होने के बावजूद कांग्रेस के कार्यकर्ता गांवों से लेकर जिला स्तर तक संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए काम कर रहे हैं।
चुनावी गड़बड़ियों के आरोपों पर भी रखी बात
सोनिया गांधी ने हाल के महीनों में सामने आई चुनावी अनियमितताओं और चुनाव में गड़बड़ी से जुड़े आरोपों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के मुद्दों पर चर्चा होने से लोगों में राजनीतिक और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को लेकर जागरूकता बढ़ी है। उनके मुताबिक, चुनाव प्रक्रिया में जनता का भरोसा बनाए रखना बेहद जरूरी है। लोकतंत्र की मजबूती के लिए निष्पक्ष चुनाव और संस्थाओं की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
राजनीतिक गठबंधनों पर सोनिया गांधी का स्पष्ट रुख
विपक्षी दलों के बीच गठबंधन और राजनीतिक समझौतों को लेकर सोनिया गांधी ने कहा कि राजनीति में कई बार परिस्थितियों के अनुसार फैसले लेने पड़ते हैं। कभी-कभी ऐसे दलों के साथ भी गठबंधन करना पड़ता है, जिनकी विचारधारा कांग्रेस से पूरी तरह मेल नहीं खाती।
हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि इस तरह के राजनीतिक समझौते उनके लिए हमेशा सहज नहीं रहे हैं। सोनिया गांधी ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस ने कभी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के साथ समझौता नहीं किया है और भविष्य में भी ऐसा करने का सवाल नहीं है।
धर्मनिरपेक्षता पर कांग्रेस की विचारधारा का किया जिक्र
सोनिया गांधी ने कांग्रेस के भीतर धर्मनिरपेक्षता को लेकर अलग-अलग नेताओं की राय पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पार्टी के कुछ नेताओं की सोच इस मुद्दे पर स्पष्ट और सख्त रुख अपनाने के पक्ष में नहीं रही है, लेकिन इसे कांग्रेस की आधिकारिक विचारधारा नहीं माना जाना चाहिए। उनके मुताबिक, कांग्रेस की मूल राजनीतिक सोच और भाजपा-आरएसएस की विचारधारा के बीच बुनियादी अंतर है। पार्टी संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखेगी।
आत्मकथा को लेकर भी चर्चा में हैं सोनिया गांधी
राजनीतिक बयानबाजी के बीच सोनिया गांधी की आने वाली किताब 'Belonging: A Journey of Love' भी सुर्खियों में है। इंस्टाग्राम पर अपनी पहली पोस्ट के जरिए उन्होंने इस आत्मकथा की झलक दिखाई थी। किताब के सामने आने के साथ उनके व्यक्तिगत जीवन, राजनीतिक सफर और देश की राजनीति से जुड़े अनुभवों को लेकर भी लोगों की उत्सुकता बढ़ी है।
कुल मिलाकर, सोनिया गांधी का यह इंटरव्यू ऐसे समय में सामने आया है, जब देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं, चुनावी प्रक्रिया और विपक्ष की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। उनके बयानों से साफ है कि कांग्रेस आने वाले समय में लोकतंत्र, संविधान और धर्मनिरपेक्षता के मुद्दों को अपनी राजनीतिक रणनीति का प्रमुख हिस्सा बनाए रखना चाहती है।