मुंबई: महाराष्ट्र के लोगों को महंगाई का एक और झटका लगने वाला है। राज्य में दूध की कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला किया गया है। गाय और भैंस, दोनों तरह के दूध के दाम 11 अगस्त से 2 रुपये प्रति लीटर बढ़ जाएंगे। दूध की कीमत बढ़ने से आम परिवारों के मासिक बजट पर सीधा असर पड़ने की संभावना है।दूध की कीमतों में यह वृद्धि डेयरी क्षेत्र में बढ़ती लागत को देखते हुए की गई है। दूध उत्पादकों और प्रोसेसिंग से जुड़े प्रतिनिधियों की बैठक के बाद नई कीमत लागू करने का निर्णय लिया गया।
दूध के दाम बढ़ाने पर बनी सहमति
जानकारी के अनुसार, दूध की कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला 'मिल्क प्रोड्यूसर्स एंड प्रोसेसर्स वेलफेयर एसोसिएशन' की बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता एसोसिएशन के अध्यक्ष ने की।बैठक में दूध उत्पादन से लेकर उसके परिवहन, पैकेजिंग और प्रोसेसिंग तक बढ़ी लागत पर चर्चा की गई। इसके बाद एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने दूध की बिक्री कीमत में बढ़ोतरी पर सहमति जताई।नई दरें मंगलवार, 11 अगस्त से लागू होने की बात कही गई है।
गाय और भैंस दोनों के दूध पर पड़ेगा असर
कीमतों में बढ़ोतरी सिर्फ एक श्रेणी के दूध तक सीमित नहीं रहेगी। एसोसिएशन के फैसले के मुताबिक गाय और भैंस दोनों तरह के दूध की बिक्री कीमत में 2 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की जाएगी।इससे महाराष्ट्र में रोजाना दूध खरीदने वाले लाखों उपभोक्ताओं को अतिरिक्त खर्च करना होगा। दूध की कीमत बढ़ने का असर केवल घरेलू इस्तेमाल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि चाय, मिठाई, दही, पनीर और अन्य डेयरी उत्पादों की लागत पर भी पड़ सकता है।
डीजल और पैकेजिंग लागत बढ़ने का दिया हवाला
दूध की कीमत बढ़ाने के पीछे डेयरी एसोसिएशन ने उत्पादन और सप्लाई से जुड़ी बढ़ती लागत को प्रमुख कारण बताया है।एसोसिएशन के मुताबिक, डीजल की कीमत में करीब 10 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। दूध को गांवों और उत्पादन केंद्रों से डेयरी प्लांट तक पहुंचाने के साथ-साथ तैयार उत्पाद को बाजार तक पहुंचाने में परिवहन लागत महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में ईंधन महंगा होने का सीधा असर डेयरी कारोबार पर पड़ता है।इसके अलावा पैकेजिंग की लागत में भी करीब 30 प्रतिशत तक वृद्धि होने की बात कही गई है। दूध की पैकिंग और वितरण व्यवस्था में इस्तेमाल होने वाली सामग्री महंगी होने से कंपनियों की लागत बढ़ी है।
दूध खरीदने की लागत भी बढ़ी
एसोसिएशन ने यह भी बताया कि दूध उत्पादकों से दूध खरीदने की कीमत में बढ़ोतरी हुई है। आने वाले समय में इसमें और वृद्धि की संभावना जताई गई है।दूध की खरीद कीमत बढ़ने का असर डेयरियों की कुल लागत पर पड़ता है। उत्पादन, संग्रहण, परिवहन, पैकेजिंग और वितरण जैसे सभी चरणों में खर्च बढ़ने के बाद डेयरियों पर कीमतों में संशोधन का दबाव बढ़ा है।इसी लागत को ध्यान में रखते हुए दूध की बिक्री कीमत में 2 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि करने का निर्णय लिया गया है।
डेयरी उत्पाद भी हो सकते हैं महंगे
दूध के साथ-साथ अन्य डेयरी उत्पादों की कीमतों को लेकर भी उपभोक्ताओं को झटका लग सकता है। एसोसिएशन ने डेयरी उत्पादों की कीमतों में 10 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करने का फैसला किया है।इसका असर दही, छाछ, पनीर, मक्खन, घी और अन्य दूध से तैयार उत्पादों पर पड़ सकता है। हालांकि अलग-अलग उत्पादों और कंपनियों के हिसाब से कीमतों में बदलाव अलग हो सकता है।
घरेलू बजट पर बढ़ेगा असर
दूध रोजमर्रा की जरूरतों में शामिल प्रमुख खाद्य पदार्थों में से एक है। अधिकांश परिवारों में इसकी नियमित खपत होती है। ऐसे में प्रति लीटर 2 रुपये की बढ़ोतरी छोटी दिखाई दे सकती है, लेकिन रोजाना दूध खरीदने वाले परिवारों के लिए महीने के अंत में अतिरिक्त खर्च जुड़ जाएगा।वहीं, दूध से बने उत्पादों की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी का असर रेस्टोरेंट, चाय-कॉफी दुकानों और मिठाई कारोबार पर भी पड़ सकता है। कारोबारी बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा आगे ग्राहकों तक पहुंचा सकते हैं।
11 अगस्त से लागू होंगी नई कीमतें
एसोसिएशन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि दूध की नई बिक्री कीमतें 11 अगस्त से लागू होंगी। यानी महाराष्ट्र में मंगलवार से उपभोक्ताओं को दूध के लिए पहले की तुलना में 2 रुपये अधिक चुकाने होंगे।दूध की कीमतों में यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब खाद्य और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी वस्तुओं की कीमतें पहले से ही आम लोगों के बजट को प्रभावित कर रही हैं। अब दूध और डेयरी उत्पादों की बढ़ी कीमतें भी घरेलू खर्च पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं।
महंगाई के बीच बढ़ी चिंता
महाराष्ट्र में दूध की कीमतों में प्रस्तावित वृद्धि ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। दूसरी ओर, डेयरी क्षेत्र का कहना है कि उत्पादन और संचालन की लागत लगातार बढ़ने के कारण कीमतों में संशोधन जरूरी हो गया था।फिलहाल 11 अगस्त से दूध की नई कीमतें लागू होने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बाजार में अलग-अलग डेयरियां और ब्रांड अपने उत्पादों के दाम में कितना बदलाव करते हैं।