थराली विधानसभा क्षेत्र के देवाल विकासखंड के दूरस्थ गांव हरमल के ग्रामीणों ने मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर आगामी चुनावों के बहिष्कार का ऐलान कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से सड़क स्वास्थ्य पेयजल और संचार सुविधाओं की मांग किए जाने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है। ऐसे में यदि चुनाव से पहले उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे चुनाव बहिष्कार के साथ-साथ आंदोलन करने को भी मजबूर होंगे।
उपजिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन
क्षेत्र पंचायत सदस्य रमेश गड़िया और ग्राम प्रधान आलम राम के नेतृत्व में ग्रामीणों के एक शिष्टमंडल ने उपजिलाधिकारी थराली यशवीर रावत को ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्याओं से अवगत कराया। ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया कि हरमल गांव लंबे समय से सड़क सुविधा से वंचित है। सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीण वर्ष 2008 में भी चुनाव बहिष्कार कर चुके हैं लेकिन इसके बाद भी उन्हें केवल आश्वासन ही मिले हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव तक पहुंचने के लिए उन्हें करीब 8 किलोमीटर की लंबी पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। इससे रोजमर्रा की जरूरतों के साथ-साथ मरीजों बुजुर्गों और विद्यार्थियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
जल जीवन मिशन योजना की जांच
ज्ञापन में ग्रामीणों ने करोड़ों रुपये की लागत से बनी जल जीवन मिशन योजना की जांच कराने की भी मांग उठाई है। उनका आरोप है कि योजना के संचालन और कार्यों में अनियमितताओं की जांच आवश्यक है। इसके अलावा खेता में स्थापित बीएसएनएल टावर की बदहाल स्थिति के कारण क्षेत्र में संचार सेवाएं प्रभावित हो रही हैं जिससे ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने हरमल स्थित एएनएम सेंटर में लंबे समय से एएनएम का पद रिक्त होने का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में ग्रामीणों को उपचार के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों का रुख करना पड़ता है।
प्रशासन को दी चेतावनी
ग्रामीणों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि चुनाव से पहले सड़क निर्माण स्वास्थ्य सेवाओं की बहाली जल जीवन मिशन योजना की जांच और संचार सुविधाओं में सुधार सहित उनकी प्रमुख मांगों का समाधान नहीं किया गया तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेंगे और चुनाव का बहिष्कार करने के लिए बाध्य होंगे।
उपजिलाधिकारी थराली यशवीर रावत ने ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देने का आश्वासन दिया है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें केवल आश्वासन नहीं बल्कि जमीनी स्तर पर परिणाम चाहिए।