कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे निर्णायक दौर में प्रवेश कर रहा है, भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी मशीनरी को पूरी ताकत से मैदान में उतार दिया है। इसी कड़ी में केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने बुधवार को कोलकाता पहुंचकर दूसरे चरण की सीटों के लिए गहन रणनीतिक बैठकें शुरू कर दीं।
देर रात तक चली मैराथन बैठक
शहर के एक प्रमुख होटल में रात करीब 8 बजे शुरू हुई यह बैठक आधी रात के बाद तक जारी रही। इस दौरान अमित शाह ने दूसरे चरण की 142 विधानसभा सीटों के प्रभारियों और बाहरी राज्यों से आए अनुभवी ‘प्रवासी कार्यकर्ताओं’ के साथ सीधे संवाद कर जमीनी हकीकत का आकलन किया।
बूथ मैनेजमेंट पर सबसे ज्यादा जोर
सूत्रों के मुताबिक, बैठक का मुख्य फोकस कमजोर बूथों को मजबूत बनाना रहा। शाह ने साफ संदेश दिया कि केवल बड़ी रैलियां चुनाव नहीं जितातीं, बल्कि बूथ स्तर की तैयारी ही जीत की असली कुंजी होती है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को हर बूथ को ‘अभेद्य किला’ बनाने के निर्देश दिए।
प्रवासी कार्यकर्ताओं को खास जिम्मेदारी
बैठक में यह भी तय किया गया कि दूसरे राज्यों से आए अनुभवी कार्यकर्ता स्थानीय समीकरणों को समझते हुए घर-घर संपर्क अभियान को तेज करेंगे। इन कार्यकर्ताओं को जमीनी स्तर पर वोटरों से सीधे जुड़ने और पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने की जिम्मेदारी दी गई है।
स्थानीय मुद्दों को भुनाने की रणनीति
राज्य में हाल की घटनाओं और विवादों को लेकर पैदा हुए जनाक्रोश को वोट में तब्दील करने की रणनीति पर भी चर्चा हुई। पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि स्थानीय मुद्दों को प्रभावी तरीके से जनता तक पहुंचाना इस चरण में बेहद अहम होगा।
डेटा और रिपोर्ट कार्ड के आधार पर रणनीति
अमित शाह ने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र की रिपोर्ट का बारीकी से विश्लेषण किया और प्रभारियों को स्पष्ट लक्ष्य सौंपे। डेटा आधारित फीडबैक के जरिए कमजोर और मजबूत क्षेत्रों की पहचान कर उसी हिसाब से चुनावी रणनीति तैयार की जा रही है।
27 अप्रैल तक कोलकाता में रहेंगे शाह
यह दौरा केवल औपचारिक नहीं माना जा रहा है। खबर है कि अमित शाह 27 अप्रैल तक कोलकाता में ही डेरा डालेंगे और लगातार संगठनात्मक बैठकों के जरिए चुनावी रणनीति को धार देंगे। इस दौरान कई अहम नेताओं और कार्यकर्ताओं से उनकी मुलाकातें भी प्रस्तावित हैं।
TMC के लिए बढ़ी चुनौती
पहले चरण के मतदान (23 अप्रैल) और दूसरे चरण (29 अप्रैल) के बीच शाह का लगातार कोलकाता में रहना सत्तारूढ़ All India Trinamool Congress के लिए बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह दौरा खासतौर पर उन क्षेत्रों पर केंद्रित है जहां मुकाबला बेहद कड़ा है।
माइक्रो-मैनेजमेंट से बढ़ेगा मनोबल
विशेषज्ञों के अनुसार, अमित शाह का यह माइक्रो-मैनेजमेंट न केवल संगठन को मजबूत करेगा, बल्कि कार्यकर्ताओं के आत्मविश्वास को भी बढ़ाएगा। साथ ही, मतदान के दिन बेहतर समन्वय और अधिकतम वोटिंग सुनिश्चित करने में भी यह रणनीति कारगर साबित हो सकती है।