कोलकाता: क्या नाच, गान, कविता पाठ और थिएटर जैसे सांस्कृतिक क्षेत्रों से जुड़े कलाकारों का भविष्य अब अंधेरे में है? भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की एक हालिया अधिसूचना ने बंगाल के सांस्कृतिक हलकों में बेचैनी पैदा कर दी है। गुरुवार को कोलकाता प्रेस क्लब में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में 'वेस्ट बंगाल परफॉर्मिंग आर्टिस्ट्स कम्युनिटी' के सदस्यों ने केंद्र के इस फैसले के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया।
क्या है विवाद की मुख्य वजह?
आंदोलनकारी कलाकारों का आरोप है कि मंत्रालय की नई नीति में 'Cooled Off' जैसे अस्पष्ट शब्द का इस्तेमाल किया गया है। कलाकारों का दावा है कि इस शब्द की आड़ में कई पुराने और सक्रिय नाट्य समूहों को वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के लिए अनुदान (Grant) मांगने के अधिकार से वंचित किया जा रहा है।
मुख्य शिकायतें:
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सैलरी ग्रांट (Salary Grant): बिना किसी ठोस कारण के कलाकारों के वेतन अनुदान को रोक दिया गया है।
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गुरु-शिष्य परंपरा: इस महत्वपूर्ण परियोजना के नवीनीकरण की प्रक्रिया को अचानक बंद कर दिया गया है।
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आर्थिक प्रहार: कलाकारों का मानना है कि यह कला का गला घोंटने की एक सुनियोजित साजिश है।
"सवाल पूछने वालों को कम करने की कोशिश"
'रंगरूप' थिएटर ग्रुप की प्रमुख सीमा मुखोपाध्याय ने तीखा हमला बोलते हुए कहा:
"शिक्षा और संस्कृति के बजट में कटौती करना राज्य के लिए सुविधाजनक होता है, क्योंकि इससे सवाल पूछने वाले लोग कम हो जाते हैं।"
वहीं, प्रसिद्ध नाटककार बिमल चक्रवर्ती का कहना है कि हालांकि यह संकट पूरे देश में है, लेकिन बंगाल को विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि यहाँ सांस्कृतिक गतिविधियाँ अधिक सक्रिय हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने बड़े फैसले के पीछे का वास्तविक कारण क्या है?
आंकड़ों की जुबानी: संकट में 2,000 परिवार
सांख्यिकी के अनुसार, केंद्र के इस फैसले का सीधा असर पश्चिम बंगाल के लगभग 300 नाट्य समूहों और उनसे जुड़े करीब 2,000 सांस्कृतिक कर्मियों पर पड़ेगा।
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कई कलाकार पूरी तरह से 'सैलरी ग्रांट' पर निर्भर हैं।
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अनुदान बंद होने से राज्य के नाट्य बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के ढहने की आशंका है।
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नाट्य व्यक्तित्व पौलमी बसु ने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की अपील करते हुए कहा कि हमें युवा पीढ़ी के भविष्य के लिए इस लड़ाई को लड़ना होगा।
आगामी रणनीति: बड़े आंदोलन की चेतावनी
प्रेस क्लब में सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित किया गया कि केंद्र सरकार को इस विवादास्पद अधिसूचना को तुरंत वापस लेना चाहिए। कलाकारों ने स्पष्ट किया है कि वे संस्कृति मंत्रालय के साथ सार्थक चर्चा के लिए तैयार हैं। हालांकि, यदि जल्द ही कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया, तो बंगाल के कलाकार अखिल भारतीय स्तर पर अन्य थिएटर कर्मियों के साथ मिलकर एक वृहद जन-आंदोलन शुरू करेंगे।