पश्चिम मेदिनीपुर: पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले के घाटाल अनुमंडल में सांपों के काटने की घटनाओं ने किसानों और खेतिहर मजदूरों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में काम करने वाले लोग सबसे ज्यादा खतरे का सामना कर रहे हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग और वन्यजीव बचावकर्मियों ने किसानों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। अधिकारियों के मुताबिक, सुबह की ठंड और अंधेरे में खेतों में जाना जोखिम भरा हो सकता है। किसानों को पर्याप्त धूप निकलने के बाद ही खेतों में जाने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही सर्पदंश से बचाव और आपात स्थिति में सही इलाज को लेकर भी जागरूक किया जा रहा है।
सुबह-सुबह खेतों में जाने से बचें किसान
घाटाल सब-डिवीजन सोशल फॉरेस्ट्री के रेंजर रतन सरकार ने किसानों को तड़के खेतों में जाने से बचने की सलाह दी है। उनके मुताबिक, अंधेरे में खेतों में काम करना जानलेवा साबित हो सकता है। इस समय इलाके के किसान आलू की खेती की तैयारी, धान की कटाई और फसलों पर कीटनाशकों का छिड़काव कर रहे हैं। इन कामों के लिए कई किसान सुबह-सुबह खेतों में पहुंच जाते हैं। कम रोशनी के कारण खेतों की मेड़ों, झाड़ियों और घास के बीच छिपे सांप दिखाई नहीं देते। ऐसे में अनजाने में सांप के करीब पहुंचने से सर्पदंश की आशंका बढ़ जाती है। वन विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे जल्दबाजी करने के बजाय अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दें और पर्याप्त रोशनी होने के बाद ही खेतों में काम शुरू करें।
ठंड में सांपों की गतिविधियां कम होने के पीछे वैज्ञानिक कारण
घाटाल रेंज के वन्यजीव बचावकर्मी मलय घोष ने सांपों की गतिविधियों के पीछे का वैज्ञानिक कारण समझाया है। उन्होंने बताया कि सांप शीत-रक्ती यानी बाहरी तापमान पर निर्भर रहने वाले जीव हैं। इंसानों की तरह वे अपने शरीर का तापमान लगातार एक समान नहीं रख सकते। उनके शरीर का तापमान काफी हद तक आसपास के वातावरण पर निर्भर करता है। मौसम में सुबह ठंड और दोपहर में गर्मी होने के कारण उनकी गतिविधियों में भी बदलाव आता है। ठंडे वातावरण में कुछ सांपों की मांसपेशियों की गतिविधि और चलने की गति कम हो सकती है। ऐसे में वे खतरा महसूस होने पर भी तुरंत दूर नहीं जा पाते। हालांकि, सांपों का व्यवहार प्रजाति और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है, इसलिए खेतों में किसी भी सांप को संभावित खतरा मानकर सावधानी बरतना जरूरी है।
चंद्रबोड़ा सांप से ज्यादा खतरा, किसानों को सतर्क रहने की जरूरत
घाटाल इलाके में चंद्रबोड़ा यानी रसल्स वाइपर को लेकर विशेष चिंता जताई गई है। यह भारत में पाए जाने वाले अत्यंत विषैले सांपों में से एक है और इसके काटने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। वन्यजीव बचावकर्मी मलय घोष के अनुसार, सुबह के समय ठंड के कारण सांपों की गतिविधियां धीमी हो सकती हैं। ऐसे में खेत की मेड़ों पर मौजूद सांप को किसान आसानी से नहीं देख पाते। जब कोई व्यक्ति अनजाने में उसके बहुत करीब पहुंच जाता है, तो सांप खतरा महसूस कर आत्मरक्षा में काट सकता है। धान के खेतों, घास और झाड़ियों के आसपास काम करते समय विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। किसानों को बिना देखे खेत की मेड़ों पर पैर रखने या हाथ डालने से बचना चाहिए। साथ ही सांप दिखाई देने पर उसे पकड़ने या मारने की कोशिश करने के बजाय प्रशिक्षित बचावकर्मियों को सूचना देनी चाहिए।
कीटनाशकों के छिड़काव और धान की कटाई के दौरान बरतें सावधानी
वन विभाग ने खेतों में कीटनाशकों का छिड़काव करने और धान की कटाई के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी है। अधिकारियों के मुताबिक, खेत में चारों तरफ से घेरकर कीटनाशक का छिड़काव करने से सांप के बाहर निकलने का रास्ता बंद हो सकता है। इसलिए किसानों को छिड़काव करते समय सांपों के निकलने के लिए रास्ता खुला रखने की सलाह दी गई है। दी गई सलाह के अनुसार, खेत की मेड़ से कम से कम पांच फीट की दूरी बनाकर एक तरफ से छिड़काव करना चाहिए। धान की कटाई और फसल के गट्ठर बांधने जैसे काम भी पर्याप्त रोशनी और मौसम में गर्मी होने के बाद करना बेहतर है। फसल के ढेर, सूखी घास और झाड़ियों के बीच हाथ डालने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए। खेतों में काम करते समय मजबूत जूते पहनना और आसपास की स्थिति पर नजर रखना भी जोखिम कम करने में मदद कर सकता है।
सांप काटने पर झाड़-फूंक नहीं, तुरंत अस्पताल पहुंचें
वन विभाग और बचावकर्मियों ने सर्पदंश की स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेने की अपील की है। सांप काटने के बाद मरीज को झाड़-फूंक या घरेलू उपचार के भरोसे छोड़ना खतरनाक हो सकता है। सांप के काटने की जगह के ऊपर रस्सी, गमछा या कपड़ा कसकर नहीं बांधना चाहिए। घाव को काटने, चूसने या उस पर कोई घरेलू पदार्थ लगाने से भी बचना चाहिए। मरीज को शांत रखें और अनावश्यक रूप से चलने-फिरने न दें। प्रभावित अंग को यथासंभव स्थिर रखते हुए बिना देरी किए नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचाएं, जहां जरूरत पड़ने पर एंटीवेनम सहित जरूरी इलाज दिया जा सकता है। सांप की पहचान करने के लिए उसे पकड़ने या मारने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। समय पर अस्पताल पहुंचना मरीज की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
बंगाल में पिछले चार वर्षों के सर्पदंश के आंकड़े
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में पिछले चार वर्षों के दौरान सर्पदंश के मामलों और उनसे होने वाली मौतों की संख्या में काफी उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है। वर्ष 2022 में राज्य में सर्पदंश के 48,870 मामले और 478 मौतें दर्ज की गई थीं। वर्ष 2023 में मामलों की संख्या बढ़कर 60,984 रही, जबकि मौतों की संख्या 245 बताई गई। वर्ष 2024 में सर्पदंश के 85,835 मामले सामने आए और 485 लोगों की मौत हुई। वहीं, वर्ष 2025 के उपलब्ध आंकड़ों में 27,471 मामले और 65 मौतें दर्ज हैं। हालांकि, इन आंकड़ों की अवधि और रिपोर्टिंग की पूर्णता स्पष्ट नहीं है, इसलिए अलग-अलग वर्षों की सीधी तुलना सावधानी से की जानी चाहिए। ये आंकड़े सर्पदंश की समस्या की गंभीरता को रेखांकित करते हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता, समय पर इलाज तथा सुरक्षित खेती के तरीकों की जरूरत को सामने लाते हैं।
किसानों की सुरक्षा के लिए जागरूकता जरूरी
घाटाल में बढ़ती सर्पदंश की घटनाओं के बीच वन विभाग की सलाह किसानों के लिए महत्वपूर्ण है। धान की कटाई, आलू की खेती की तैयारी और कीटनाशकों के छिड़काव के दौरान खेतों में सांपों से सामना होने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में सुबह की कम रोशनी में खेतों में जाने से बचना और पर्याप्त रोशनी में काम शुरू करना समझदारी होगी। किसानों को खेतों की मेड़ों, झाड़ियों और फसल के ढेरों के आसपास विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। सांप दिखाई देने पर उससे दूरी बनाए रखना और विशेषज्ञों की मदद लेना जरूरी है। वहीं, सर्पदंश की स्थिति में बिना समय गंवाए अस्पताल पहुंचना चाहिए। वन विभाग की अपील है कि किसान खेती के जरूरी कामों के साथ अपनी सुरक्षा को भी प्राथमिकता दें, ताकि सर्पदंश से होने वाली दुर्घटनाओं और मौतों को कम किया जा सके।