कोलकाता: हॉकी बंगाल की वार्षिक आम बैठक (AGM) को लेकर विवाद गहरा गया है। नगर निकाय भर्ती घोटाले में जेल में बंद पश्चिम बंगाल के पूर्व दमकल मंत्री सुजीत बोस का नाम एक बार फिर संगठन के अध्यक्ष के तौर पर सामने आया है। बैठक की वैधता और नियुक्तियों को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
सुजीत बोस को नगर निकाय भर्ती भ्रष्टाचार मामले में 11 मई 2026 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद हॉकी बंगाल के तत्कालीन वरिष्ठ उपाध्यक्ष नंदकिशोर राय को अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लेकिन अब 14 अक्टूबर को हुई AGM की बैठक के मिनट्स में सुजीत बोस का नाम फिर अध्यक्ष के तौर पर दर्ज होने का दावा किया गया है।
14 अक्टूबर की बैठक पर सवाल
नंदकिशोर राय ने आरोप लगाया है कि AGM बुलाने में नियमों का पालन नहीं किया गया। उनका कहना है कि उन्हें खुद बैठक में शामिल होने का नोटिस नहीं मिला। संयुक्त सचिव सुरभि मित्र समेत कई अन्य पदाधिकारियों की अनुपस्थिति को लेकर भी बैठक की वैधता पर सवाल उठ रहे हैं।
खेल के विकास के लिए मिले फंड पर भी विवाद
नंदकिशोर राय ने हॉकी इंडिया की ओर से बंगाल में खेल के प्रचार-प्रसार के लिए दिए गए फंड के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि 2018 से विभिन्न जिलों में लाखों रुपये खर्च किए जाने का हिसाब दिखाया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर अपेक्षित काम नहीं हुआ। वर्ष 2021-22 में महिला राष्ट्रीय हॉकी टूर्नामेंट के आयोजन के लिए राज्य सरकार से मिले लगभग 50 लाख रुपये के इस्तेमाल पर भी उन्होंने अनियमितता का आरोप लगाया है।
हॉकी बंगाल के महासचिव ने आरोपों को नकारा
हॉकी बंगाल के महासचिव इश्तियाक अली ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि संगठन में कोई नियम उल्लंघन नहीं हुआ। उन्होंने दावा किया कि नए स्पोर्ट्स कोड के तहत अध्यक्ष का चुनाव 2028 में होना है और सुजीत बोस के खिलाफ आरोप अभी साबित नहीं हुए हैं। इसलिए उन्हें पद से हटाने की प्रक्रिया भी नियमों के अनुरूप ही होनी चाहिए।
पूर्व अध्यक्ष स्वपन बनर्जी भी हैरान
हॉकी बंगाल के पूर्व अध्यक्ष स्वपन बनर्जी ने भी इस घटनाक्रम पर हैरानी जताई है। उनका कहना है कि यदि जेल में बंद सुजीत बोस को दोबारा अध्यक्ष बनाया गया है, तो यह नियमों के खिलाफ हो सकता है। वहीं, संयुक्त सचिव सुरभि मित्र ने भी पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
फिलहाल हॉकी बंगाल में अध्यक्ष पद को लेकर विवाद जारी है। अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारियों की शिकायत पर क्या कार्रवाई होती है और संगठन के भीतर उठे इन सवालों का जवाब कैसे मिलता है।