नई दिल्ली - विश्व बैंक की अक्टूबर 2026 की ‘इंडिया पावर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ’ रिपोर्ट को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन पर निशाना साधा है। भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि रिपोर्ट में सामने आए गरीबी घटने के आंकड़े विपक्ष के उस कार्यक्रम के दावों से अलग तस्वीर पेश करते हैं, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘सार्वजनिक महाभियोग’ कार्यक्रम आयोजित किया गया था। विपक्ष ने यह कार्यक्रम चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में किया था।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने राहुल गांधी को खुश करने के लिए ‘मॉक पार्लियामेंट’ आयोजित की, जबकि उसी समय विश्व बैंक के आंकड़े देश में गरीबी कम होने की तस्वीर सामने रख रहे थे। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने बड़ी आबादी को गरीबी से बाहर निकालने में सफलता हासिल की है।
विश्व बैंक के आंकड़ों में गरीबी घटने का दावा
त्रिवेदी ने विश्व बैंक की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि भारत में अत्यधिक गरीबी का स्तर 2011-12 के 27.1 प्रतिशत से घटकर 2023-24 में 2.6 प्रतिशत रह गया है। उन्होंने यह भी बताया कि 4.20 डॉलर प्रतिदिन की निम्न-मध्यम आय वाले देशों की गरीबी रेखा के नीचे रहने वाली आबादी का अनुपात 2011-12 में 57.7 प्रतिशत था, जो 2023-24 में घटकर 16.1 प्रतिशत हो गया।
विश्व बैंक के अक्टूबर 2026 के ब्रीफ के अनुसार, इस अवधि में करीब 49.6 करोड़ लोग 4.20 डॉलर प्रतिदिन वाली गरीबी सीमा से ऊपर आए। रिपोर्ट में अत्यधिक गरीबी के लिए 3 डॉलर प्रतिदिन की अलग सीमा का इस्तेमाल किया गया है। ये आंकड़े 2021 की क्रय शक्ति समता (PPP) के आधार पर हैं।
आर्थिक असमानता पर भी किया रिपोर्ट का जिक्र
भाजपा सांसद ने अगस्त 2025 में जारी विश्व बैंक के गिनी इंडेक्स का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत का गिनी इंडेक्स स्कोर 22.5 था और उनके अनुसार इस आधार पर देश आर्थिक समानता के मामले में दुनिया में चौथे स्थान पर था। त्रिवेदी ने दावा किया कि उस समय G7 और G20 देशों में भारत में आर्थिक असमानता सबसे कम थी।
उन्होंने कहा कि गरीबी कम करने और लोगों के जीवन स्तर में सुधार के लिए केंद्र सरकार लगातार काम कर रही है। उनके मुताबिक, विश्व बैंक के आंकड़े सरकार की नीतियों के परिणामों को दर्शाते हैं।
राहुल गांधी और कांग्रेस पर साधा निशाना
त्रिवेदी ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के पुराने बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अगस्त 2013 में गरीबी को ‘मानसिकता’ बताया था। भाजपा सांसद ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के उस कथन का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि पैसा पेड़ों पर नहीं उगता।
इन बयानों के आधार पर त्रिवेदी ने कांग्रेस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच के बीच अंतर बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दौरान गरीबी की समस्या को पर्याप्त गंभीरता से नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि अब विश्व बैंक के आंकड़े दिखाते हैं कि देश में गरीबी के स्तर में बड़ी गिरावट आई है।
विपक्ष के कार्यक्रम को लेकर भाजपा का हमला
त्रिवेदी ने कहा कि एक ओर प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार गरीबी कम करने और लोगों का जीवन स्तर बेहतर बनाने के लिए काम कर रही है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस और विपक्षी दल सरकार को घेरने के लिए राजनीतिक कार्यक्रम कर रहे हैं। उन्होंने विपक्ष के ‘मॉक पार्लियामेंट’ कार्यक्रम पर तंज कसते हुए कहा कि विश्व बैंक के आंकड़ों ने उसकी राजनीतिक दलीलों को कमजोर कर दिया है।
हालांकि, गरीबी में गिरावट के आंकड़े अपने आप में सरकार की नीतियों के प्रभाव का पूरा आकलन नहीं हैं। विश्व बैंक की रिपोर्ट में गरीबी के मापन के लिए अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय सीमाओं का इस्तेमाल किया गया है। वहीं, इन आंकड़ों को लेकर भाजपा की राजनीतिक व्याख्या और त्रिवेदी के आरोप उनके अपने बयान हैं।