कोलकाता: कोलकाता में भवन निर्माण परियोजनाओं की मंजूरी लंबे समय से ठप पड़ी है। बताया जा रहा है कि पिछले चार महीनों से बिल्डिंग प्लान से जुड़ी फाइलों पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। इससे नए निर्माण कार्य शुरू होने में लगातार देरी हो रही है और रियल एस्टेट सेक्टर पर इसका सीधा असर दिखाई दे रहा है।
एमबीसी की बैठकें नहीं होने से अटके प्रस्ताव
भवन निर्माण प्रस्तावों की तकनीकी समीक्षा करने वाली म्यूनिसिपल बिल्डिंग कमेटी (एमबीसी) की बैठकें लंबे समय से आयोजित नहीं हुई हैं। इसके चलते बड़ी संख्या में बिल्डिंग प्लान मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं और स्वीकृति प्रक्रिया लगभग ठहर गई है।
निर्माण कारोबारियों की बढ़ीं मुश्किलें
बिल्डर्स, डेवलपर्स और इंजीनियरों का कहना है कि मंजूरी में देरी से परियोजनाओं की लागत लगातार बढ़ रही है। कई निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहे हैं, जिससे निवेश और रोजगार दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
नगर निगम के राजस्व पर भी पड़ रहा असर
नई इमारतों की मंजूरी से नगर निगम को विभिन्न शुल्कों के रूप में आय होती है। लेकिन स्वीकृति प्रक्रिया धीमी होने के कारण राजस्व संग्रह भी प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
अवैध निर्माण के मामलों पर प्राथमिकता
फिलहाल नगर निगम का फोकस अवैध निर्माण से जुड़े मामलों के समाधान पर है। अधिकारियों का मानना है कि पहले इन मामलों का निपटारा किया जाएगा, उसके बाद नई बिल्डिंग योजनाओं की मंजूरी की प्रक्रिया में तेजी लाई जा सकती है।
राहत का इंतजार
निर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि लंबित फाइलों पर जल्द फैसला होगा। यदि मंजूरी प्रक्रिया जल्द शुरू नहीं हुई तो निर्माण उद्योग के साथ-साथ इससे जुड़े हजारों लोगों पर आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है।