सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब देशभर में सभी आपातकालीन सेवाओं के लिए केवल डायल-112 को एकीकृत इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर बनाया जाएगा। अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तीन महीने के भीतर अलग-अलग इमरजेंसी नंबरों को डायल-112 में मर्ज करने का निर्देश दिया है। साथ ही सभी राज्यों से इस व्यवस्था के क्रियान्वयन की अनुपालन रिपोर्ट भी मांगी गई है। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में यह एकीकृत प्रणाली पहले से संचालित हो रही है।
रायपुर में शुरू हुई इमरजेंसी सेवाओं के एकीकरण की तैयारी
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद छत्तीसगढ़ में सभी इमरजेंसी सेवाओं को एक प्लेटफॉर्म पर लाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। हाल ही में गृह विभाग के अधिकारियों ने डायल-112 के साथ विभिन्न आपातकालीन सेवाओं के एकीकरण को लेकर बैठक की, जिसमें विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने पर चर्चा हुई।
प्रदेश में वर्तमान में डायल-112 की लगभग 400 और मेडिकल इमरजेंसी सेवा 108 की करीब 375 गाड़ियां संचालित हैं। फिलहाल पुलिस, फायर और मेडिकल सहायता के लिए डायल-112 के जरिए कॉल दर्ज की जाती हैं, लेकिन अलग-अलग हेल्पलाइन नंबर होने के कारण कई बार लोगों में भ्रम की स्थिति बन जाती है। नई व्यवस्था का उद्देश्य सभी सेवाओं को एक ही प्लेटफॉर्म पर जोड़कर प्रतिक्रिया समय को कम करना है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों दिए ये निर्देश?
सुप्रीम कोर्ट ने 26 मई 2026 को सेव लाइफ फाउंडेशन बनाम भारत संघ मामले की सुनवाई के दौरान यह महत्वपूर्ण आदेश जारी किया। अदालत ने कहा कि सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिलने से कई बार उनकी जान चली जाती है। इसलिए ट्रॉमा केयर तक त्वरित पहुंच संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है।
छत्तीसगढ़ में 2018 से संचालित है डायल-112
छत्तीसगढ़ में डायल-112 सेवा की शुरुआत 15 अगस्त 2018 को "एक्के नंबर, सब्बो बर" थीम के साथ की गई थी। शुरुआती दौर में यह सेवा कुछ जिलों तक सीमित थी, लेकिन बाद में इसे प्रदेश के सभी 33 जिलों तक विस्तार दिया गया। इसके साथ 400 नई डायल-112 वाहन और एकीकृत आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली भी शुरू की गई।
छत्तीसगढ़ में कैसे काम करता है डायल-112 सिस्टम?
राज्य में किसी भी आपात स्थिति में डायल-112 पर कॉल आने के बाद कंट्रोल रूम घटना और लोकेशन की जानकारी दर्ज करता है। मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में सूचना तत्काल 108 एंबुलेंस सेवा को भेजी जाती है, जबकि आग लगने की घटना होने पर फायर विभाग को अलर्ट किया जाता है।
अब सरकार सभी सेवाओं को एकीकृत प्लेटफॉर्म पर लाने की तैयारी कर रही है, ताकि अलग-अलग सिस्टम के बीच सूचना और लोकेशन ट्रांसफर में लगने वाला समय बचाया जा सके और लोगों को तेजी से सहायता मिल सके।
रोजाना करीब 10 हजार कॉल संभाल रहा है डायल-112
कुल अटेंड कॉल: 3,06,264
कुल रजिस्टर्ड इवेंट: 79,782
(ये आंकड़े 20 मई से 16 जून 2026 तक के हैं।)
सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश
सभी इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबरों को डायल-112 में एकीकृत किया जाए।
सड़क दुर्घटना पीड़ितों को कैशलेस इलाज की सुविधा मिले।
गुड सेमेरिटन (Good Samaritan) सुरक्षा व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू की जाए।
सभी एंबुलेंस में जीपीएस और वीएलटीडी (VLTD) अनिवार्य किए जाएं।
पैरामेडिकल स्टाफ को मानकीकृत प्रशिक्षण दिया जाए।
ट्रॉमा रजिस्ट्री तैयार की जाए और अस्पतालों की ग्रेडिंग की जाए।
बहुभाषी जनजागरूकता अभियान चलाया जाए।
सभी राज्यों से तय समय सीमा में अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत कराई जाए।