चुनावी तैयारियों के बीच कोलकाता की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था चरमरा गई है। आम दिनों में जहां हजारों ऐप-कैब सड़कों पर दौड़ती थीं, वहीं अब उनकी संख्या बेहद सीमित हो गई है। तेज गर्मी के बीच बसों की भारी कमी ने रोज़ाना सफर करने वाले लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं।
बसों की भारी कमी से बिगड़ी हालत
सूत्रों के मुताबिक, चुनावी कार्यों के लिए शहर की अधिकांश बसों को अधिग्रहित कर लिया गया है। करीब 90 प्रतिशत बसें सड़कों से हट जाने के कारण प्रमुख रूटों पर परिवहन व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। सियालदह, हावड़ा, एयरपोर्ट, न्यू टाउन और सेक्टर फाइव जैसे व्यस्त इलाकों में यात्रियों की भीड़ संभालना मुश्किल हो रहा है।
भीड़ इतनी कि चढ़ना मुश्किल
जो कुछ बसें चल रही हैं, उनमें इतनी भीड़ है कि यात्रियों के लिए जगह मिलना चुनौती बन गया है। खासकर बुजुर्गों और महिलाओं के लिए सफर करना बेहद कठिन हो गया है। कई लोग घंटों बस स्टॉप पर इंतजार करने को मजबूर हैं।
कैब और बाइक सेवाओं ने बढ़ाया बोझ
बसों की कमी के चलते लोग ऐप-कैब और बाइक सेवाओं का सहारा ले रहे हैं, लेकिन यहां भी राहत नहीं मिल रही। बढ़ती मांग का फायदा उठाकर किराए में 30 से 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है। छोटी दूरी जैसे श्यामबाजार से सियालदह तक के लिए भी यात्रियों से 350 से 400 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। बाइक सेवाओं में भी किराया 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ चुका है।
यात्रियों की परेशानी बढ़ी
स्थानीय यात्रियों का कहना है कि रोज़ाना ऑफिस पहुंचना अब किसी जंग से कम नहीं रह गया है। लंबे इंतजार और भीड़ के बीच सफर करना बेहद थकाऊ हो गया है। कई लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ कैब ड्राइवर ऐप के तय किराए से ज्यादा पैसे मांग रहे हैं और मना करने पर राइड कैंसल कर दे रहे हैं।
पहले से दी गई थी चेतावनी
बस ऑपरेटर्स से जुड़े संगठनों का कहना है कि उन्होंने पहले ही इस स्थिति की आशंका जताई थी। परिवहन विभाग से अनुरोध किया गया था कि हर रूट पर कम से कम कुछ बसें चालू रखी जाएं, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया। अब इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।