कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले सियासी माहौल गरमाता जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा के एक बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। गुजराती समुदाय को लेकर की गई उनकी टिप्पणी पर न सिर्फ राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज हुई, बल्कि पार्टी को भी बैकफुट पर आना पड़ा। मामले के तूल पकड़ने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पड़ी।
क्या है पूरा विवाद
कोलकाता में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान महुआ मोइत्रा ने स्वतंत्रता संग्राम में बंगालियों की भूमिका को प्रमुख बताते हुए गुजराती समुदाय की भागीदारी पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि कालापानी (अंडमान की सेल्युलर जेल) में कैद किए गए स्वतंत्रता सेनानियों में बड़ी संख्या बंगालियों की थी, जबकि गुजराती समुदाय का योगदान नगण्य था। उन्होंने यह भी कहा कि बंगालियों ने अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व किया और तुलना करते हुए गुजराती समुदाय की भूमिका को कमतर बताया। इस बयान में उन्होंने अनजाने में स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर को गुजराती बता दिया, जबकि वे महाराष्ट्र से थे।
राजनीतिक हमले और बयानबाजी तेज
अपने बयान के दौरान महुआ मोइत्रा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि वे अवैध प्रवासियों के मुद्दे पर कार्रवाई के नाम पर बंगालियों को टारगेट कर रहे हैं। इस बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी ने तृणमूल कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और इसे क्षेत्रीय और सामुदायिक भावनाओं को भड़काने वाला बताया।
गुजराती समाज में नाराजगी
महुआ मोइत्रा के बयान के बाद खासकर कोलकाता के भवानीपुर इलाके में रहने वाले गुजराती समुदाय में भारी नाराजगी देखने को मिली। लोगों ने इसे अपमानजनक और भेदभावपूर्ण बताया। स्थानीय स्तर पर विरोध बढ़ने के साथ यह मुद्दा चुनावी राजनीति में भी असर डालने लगा, क्योंकि भवानीपुर सीट पर गुजराती मतदाताओं की अच्छी-खासी संख्या है।
ममता बनर्जी ने मांगी माफी
विवाद बढ़ने पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने गुजराती समुदाय से माफी मांगते हुए कहा कि पार्टी इस तरह की टिप्पणियों का समर्थन नहीं करती। तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने भी स्पष्ट किया कि महुआ मोइत्रा ने यह बयान पार्टी से बिना अनुमति के दिया था। पार्टी की ओर से जारी संदेश में कहा गया कि सभी समुदायों का सम्मान करना उनकी प्राथमिकता है।
चुनावी माहौल पर असर
बंगाल में चुनावी प्रचार अपने चरम पर है और ऐसे में इस तरह के विवादित बयान राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं। खासकर भवानीपुर जैसी अहम सीट पर इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है, जहां विभिन्न समुदायों के वोट निर्णायक भूमिका निभाते हैं। महुआ मोइत्रा के बयान ने एक बार फिर चुनावी राजनीति में बयानबाजी की सीमाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर तृणमूल कांग्रेस को सफाई और माफी के जरिए नुकसान नियंत्रित करना पड़ा, वहीं विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बनाकर चुनावी लाभ लेने की कोशिश कर रहा है।