कोलकाता में मेट्रो विस्तार की राह में आ रही सबसे बड़ी बाधा आखिरकार दूर हो गई है। सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार के महज 72 घंटे के भीतर पश्चिम बंगाल सरकार और कोलकाता पुलिस ने अपनी जिद छोड़ते हुए मेट्रो के काम को अनुमति दे दी है। सालो से अटका पड़ा चिंगड़ीघाटा मेट्रो प्रोजेक्ट अब 15 मई से रफ्तार पकड़ेगा।
न्यू गरिया से कोलकाता एयरपोर्ट के बीच निर्माणाधीन मेट्रो की 'ऑरेंज लाइन' अब जल्द ही हकीकत बनने जा रही है। चिंगड़ीघाटा के जिस मोड़ पर मात्र 316 वर्ग मीटर हिस्से के लिए महीनों से विवाद चल रहा था, उस पर कोलकाता ट्रैफिक पुलिस ने एनओसी (NOC) जारी कर दी है। पुलिस द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, मेट्रो अधिकारियों को 15 मई के बाद से काम शुरू करने का प्रस्ताव दिया गया है।
विवाद और कोर्ट की टिप्पणी: गौरतलब है कि पिछले सप्ताह 23 मार्च को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल मनुभाई पांचोली की पीठ ने इस मामले में राज्य सरकार के ढुलमुल रवैये पर तीखी नाराजगी व्यक्त की थी। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि:
"विकास के कार्यों में राजनीति को आड़े न आने दें। राज्य सरकार अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों को निभाने में विफल रही है।"
सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा जिसमें राज्य सरकार और पुलिस कमिश्नर को तुरंत काम की अनुमति देने का निर्देश दिया गया था।
काम का शेड्यूल: निर्माण कार्य में जुटी संस्था RVNL (रेल विकास निगम लिमिटेड) ने बताया है कि:
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15 मई से चिंगड़ीघाटा में ट्रैफिक ब्लॉक लेकर काम शुरू किया जाएगा।
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मानसून आने से पहले 366 मीटर लंबी लाइन को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
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शुरुआत में 3 से 4 दिनों के लिए ट्रैफिक डायवर्जन की अनुमति ली जाएगी, जिसके बाद चर्चा कर आगे की तारीखें तय होंगी।
चिंगड़ीघाटा का यह छोटा सा हिस्सा पूरे प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी अड़चन बना हुआ था क्योंकि यहाँ काम के लिए ईएम बाईपास पर ट्रैफिक नियंत्रण की आवश्यकता थी। अब कोर्ट के दखल और पुलिस की मंजूरी के बाद कोलकातावासियों को जल्द ही एयरपोर्ट मेट्रो की सौगात मिलने की उम्मीद जगी है।