कोलकाता/मालदा: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची (Voter List) को लेकर तनाव चरम पर पहुंच गया है। वैध दस्तावेज होने के बावजूद हजारों लोगों के नाम सूची से कटने के विरोध में राज्य के विभिन्न जिलों में आम जनता सड़कों पर उतर आई है। कहीं निर्वाचन आयोग के दफ्तर का घेराव किया गया, तो कहीं टायर जलाकर नेशनल हाईवे जाम कर दिया गया। मंगलवार सुबह से ही उत्तर से दक्षिण बंगाल तक विरोध की आग देखी गई।
मालदा: सबसे खराब हालात, ऑब्जर्वर को बनाया बंधक
मालदा जिले में स्थिति सबसे भयावह रही।
इंग्लिश बाजार: साट्टारी गांव में जब चुनाव आयोग के जनरल ऑब्जर्वर बूथ निरीक्षण के लिए पहुंचे, तो ग्रामीणों ने उन्हें करीब एक घंटे तक घेरे रखा। ग्रामीणों का आरोप है कि 2002 से नाम होने के बावजूद उन्हें अचानक 'D-Voter' श्रेणी में डाल दिया गया है।
मोथाबाड़ी: यहां 'पहले वोटर, फिर वोट' के नारों के साथ प्रदर्शन हुआ।
रतुआ: यहां विरोध इतना तेज था कि ग्रामीणों ने साप्ताहिक हाट (बाजार) तक बंद करवा दिया।
पूर्व बर्धमान: कालना-कटवा रोड पूरी तरह ठप
बर्धमान के कालना स्थित निभुजी मोड़ पर सैकड़ों लोगों ने सड़क जाम कर दी। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि उनके पास पासपोर्ट और जन्म प्रमाण पत्र जैसे पक्के दस्तावेज हैं, फिर भी बूथ लिस्ट से उनके नाम रहस्यमय तरीके से गायब कर दिए गए हैं। इस नाकेबंदी के कारण STKK रोड पर घंटों यातायात बाधित रहा।
उत्तर 24 परगना: नेशनल हाईवे पर जलाए टायर
बसीरहाट के हसनाबाद में एक ही बूथ से लगभग 257 नाम रद्द होने की खबर है। इसके विरोध में राजपुर इलाके में बसीरहाट-नजात रोड जाम किया गया। वहीं, अशोकनगर के गुमा इलाके में यशोर रोड (National Highway) पर टायर जलाकर प्रदर्शन हुआ। यहां लगभग 800 वोटरों के नाम काटे जाने का आरोप है। स्थानीय लोगों ने अब सीधे तौर पर 'वोट बहिष्कार' की चेतावनी दी है।
सिलीगुड़ी: मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला दहन
सिलीगुड़ी के हाशमी चौक पर तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार के इशारे पर चुनाव आयोग विपक्षी समर्थकों के नाम काट रहा है। प्रदर्शन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला भी फूंका गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और अर्धसैनिक बलों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।