कोलकाता: पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद शमिक भट्टाचार्य ने कहा है कि राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करना समय की जरूरत है। उनका कहना है कि विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और दत्तक ग्रहण जैसे नागरिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून होना चाहिए, जिससे संवैधानिक समानता और न्याय को मजबूती मिले।
ST समुदाय रहेगा UCC के दायरे से बाहर
सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर यूसीसी के मसौदे का हवाला देते हुए शमिक भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि संविधान द्वारा संरक्षित उनकी परंपराएं, रीति-रिवाज और विशेष अधिकार पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे तथा इन पर किसी प्रकार का प्रभाव नहीं पड़ेगा।
'कोई छिपा एजेंडा नहीं'
भट्टाचार्य ने कहा कि यूसीसी का उद्देश्य धर्म आधारित अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की जगह एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है, ताकि सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान जिम्मेदारियां सुनिश्चित की जा सकें। उन्होंने कहा कि यह कानून बहुविवाह से जुड़ी असमानताओं को दूर करने में मददगार हो सकता है, लेकिन इसका बच्चों की संख्या सीमित करने से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने लोगों से यूसीसी को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम से बचने की अपील भी की।
40 अनुसूचित जनजातियों को मिलेगी छूट
उन्होंने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत पश्चिम बंगाल में 40 अनुसूचित जनजातियां अधिसूचित हैं। इनमें संताल सबसे बड़ा समुदाय है, जबकि टोटो, बिरहोर और लोढ़ा को विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। उन्होंने कहा कि एसटी समुदाय को दी जा रही यह छूट उत्तराखंड, गुजरात और असम में लागू यूसीसी के प्रावधानों के अनुरूप है।
क्या है समान नागरिक संहिता (UCC)?
समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) एक प्रस्तावित कानूनी व्यवस्था है, जिसके तहत सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों में एक समान कानून लागू होगा, चाहे उनका धर्म कोई भी हो। इसका उद्देश्य व्यक्तिगत कानूनों में मौजूद असमानताओं को समाप्त कर लैंगिक समानता, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना है।