कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार राज्य में बंद पड़ी करीब 8,000 सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) इकाइयों को दोबारा शुरू करने की दिशा में तेजी से काम करेगी। राज्य के एमएसएमई एवं वस्त्र राज्य मंत्री अशोक डिंडा ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता इस क्षेत्र को नई गति देना और रोजगार के अवसरों को बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों में राज्य का MSME सेक्टर अपेक्षित विकास नहीं कर पाया, इसलिए इसके पुनर्जीवन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
स्थानीय उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा
अशोक डिंडा ने कहा कि बंद पड़ी MSME इकाइयों को दोबारा चालू करना सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के 'वोकल फॉर लोकल' अभियान के अनुरूप राज्य सरकार भी स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रही है। निवेश को आसान बनाने के लिए जल्द ही सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम लागू किया जाएगा, जिससे उद्योगों से जुड़ी सभी आवश्यक मंजूरियां एक ही मंच पर उपलब्ध होंगी।
MSME बनेगा औद्योगिक विकास की रीढ़
कोलकाता में अंतरराष्ट्रीय MSME दिवस के अवसर पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए अशोक डिंडा ने कहा कि MSME सेक्टर पश्चिम बंगाल के औद्योगिक विकास की रीढ़ है। उन्होंने कहा कि सरकार इस क्षेत्र को मजबूत बनाकर राज्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार को नई दिशा देना चाहती है।
उद्यमियों के लिए बनेगा बेहतर माहौल
मंत्री ने कहा कि सरकार उद्यमियों के लिए अनुकूल कारोबारी वातावरण तैयार करने, नए निवेश को आकर्षित करने और उद्योगों के विस्तार के लिए नई नीतियों पर काम कर रही है। उनका कहना था कि इन प्रयासों से राज्य में औद्योगिकीकरण को गति मिलेगी और 'विकसित बंगाल' के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी। कार्यक्रम में कई उद्योग प्रतिनिधि रहे मौजूद यह कार्यक्रम लघु उद्योग भारती, पश्चिम बंगाल (दक्षिण संभाग), इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICMAI) और MSME एवं स्टार्ट-अप प्रमोशन बोर्ड (MSPB) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। इसमें नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, उद्यमियों और MSME क्षेत्र से जुड़े कई हितधारकों ने भाग लिया। कार्यक्रम में लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष के.के. सेकसरिया, ICMAI परिषद सदस्य चित्तरंजन चट्टोपाध्याय और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज कुमार साहू सहित कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।