स्वच्छ सर्वेक्षण-2023 में इंदौर के साथ संयुक्त रूप से सबसे स्वच्छ शहर का पहला स्थान पाने वाले सूरत ने सफाई व्यवस्था इंदौर से ही सीखी। इंदौर में सफाई के लिए हुए नवाचार व अन्य माडल को सूरत के अधिकारियों ने अपने यहां लागू किया। यही वजह है कि तीन वर्षों से जो सूरत दूसरे स्थान पर बना हुआ था, इस बार के स्वच्छ सर्वेक्षण में इंदौर के साथ नंबर-1 पर आ गया।
दो वर्षों से लगातार इंदौर आए सूरत के प्रतिनिधि
दो वर्षों से लगातार सूरत के जनप्रतिनिधि, एनजीओ व कंपनियों के प्रतिनिधि इंदौर आए और डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, कचरे से कम्पोस्ट व गैस बनाने जैसे अन्य माडल लागू किए। इंदौर शहर के कचरा प्रबंधन के माडल को सूरत में लागू किया गया। यही वजह है कि अब वहां गीले, सूखे कचरे के अलावा घरेलू हानिकारक कचरा भी अलग-अलग लिया जाता है।कचरे के पहाड़ को खत्म किया
इंदौर के ट्रेंचिंग ग्राउंड पर 15 लाख टन जमा कचरे के पहाड़ को बायो रेमेडिएशन पद्धति से खत्म किया गया था। सूरत के डायमंड पार्क के पास मौजूद कचरे के पहाड़ को खत्म करने में इसी पद्धति का उपयोग किया जा रहा है।डोर-टू-डोर वाहनों में किया बदलाव
सूरत में घरों व प्रतिष्ठानों से कचरा एकत्र करने वाले डोर-टू-डोर वाहनों में पहले एक ओर गीला और दूसरी ओर सूखा कचरा डालने की व्यवस्था थी। इससे गली में वाहन जाने पर दोनों ओर के लोगों को कचरा डालने के लिए परेशानी होती थी। इंदौर की तरह सूरत के वाहनों को बदला गया।बायो सीएनजी प्लांट की तैयारी
सूरत में गीले कचरे से कम्पोस्ट बनाई जा रही थी। अब वहां पर गीले कचरे से बायो सीएनजी प्लांट लगाने की तैयारी है। सूखे कचरे की छंटाई के लिए मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी मशीन लगाई है। इंदौर की तर्ज पर सूरत में पिछले साल करीब सात कचरा ट्रांसफर स्टेशन तैयार किए गए। यहां घरों से एकत्र किया जाने वाला कचरा पहुंचाया जा रहा है।ताप्ती नदी के किनारे नाला टेपिंग
इंदौर में जिस तरह कान्ह व सरस्वती नदी में ड्रेनेज जाने से रोकने के लिए नाला टेपिंग की गई। उसी तर्ज पर सूरत की ताप्ती नदी में नाला टेपिंग के लिए 700 से 800 करोड़ रुपये का बजट बनाया गया और काम शुरू हुआ।Read More: रामलला की प्राण प्रतिष्ठा पर महाकाल मंदिर से अयोध्या भेजे जाएंगे 5 लाख लड्डू
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