संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की डेढ़ घंटे की आधिकारिक यात्रा को विदेश मंत्रालय ने बेहद महत्वपूर्ण बताया है। इस दौरान भारत और यूएई के बीच कई अहम दस्तावेजों का आदान-प्रदान हुआ और समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। दोनों देशों ने एक संयुक्त बयान भी जारी किया।
विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह यात्रा “छोटी लेकिन बहुत महत्वपूर्ण” थी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एयरपोर्ट पर व्यक्तिगत रूप से यूएई राष्ट्रपति का स्वागत किया और एयरपोर्ट से प्रधानमंत्री आवास तक उनके साथ गए। वहां दोनों नेताओं ने सीमित और बड़े फॉर्मेट में बातचीत की, जिसमें उनके प्रतिनिधिमंडलों ने भी शामिल होकर विचार-विमर्श किया। यात्रा में अबू धाबी और दुबई के शाही परिवार के सदस्य, वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी भी शामिल थे।
व्यापार और निवेश पर नई पहल
विदेश सचिव ने बताया कि 2022 में कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) के बाद भारत–यूएई का द्विपक्षीय व्यापार 100 बिलियन डॉलर पार कर गया है। अब दोनों देशों ने 2032 तक इसे 200 बिलियन डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है। इसके साथ ही MSME उद्योगों के निर्यात को पश्चिम एशियाई, अफ्रीकी और यूरोएशियाई बाजारों में आसान बनाने पर भी सहमति बनी।
रणनीतिक और तकनीकी समझौते
रक्षा क्षेत्र में सहयोग को अगले स्तर पर ले जाने के लिए दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी समझौते पर काम करने का फैसला किया। अंतरिक्ष क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं, जिसमें भारतीय संस्था In-Space और यूएई स्पेस एजेंसी के बीच स्पेस इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास और व्यावसायिक उपयोग शामिल है। दोनों देश नए लॉन्च कॉम्प्लेक्स, सैटेलाइट निर्माण फैक्ट्रियां, संयुक्त अंतरिक्ष मिशन और ट्रेनिंग सेंटर स्थापित करेंगे।
सबसे बड़ा निवेश समझौता गुजरात के धोलेरा में हुआ। यूएई अब धोलेरा में बन रहे स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन के विकास में भागीदार बनेगा। इसके तहत इंटरनेशनल एयरपोर्ट, पायलट ट्रेनिंग स्कूल, MRO सेंटर, नया बंदरगाह और स्मार्ट टाउनशिप विकसित की जाएंगी। रेलवे कनेक्टिविटी और ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को भी दोनों देश मजबूत करेंगे।
ऊर्जा, AI और सुपरकंप्यूटिंग में सहयोग
दोनों पक्षों ने एडवांस्ड न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी में साझेदारी पर भी विचार किया। इसमें बड़े न्यूक्लियर रिएक्टर, छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर, एडवांस्ड रिएक्टर सिस्टम, न्यूक्लियर पावर प्लांट ऑपरेशन, मेंटेनेंस और सेफ्टी शामिल हैं।
साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को प्राथमिक सहयोग क्षेत्र घोषित किया गया। यूएई भारत में सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर स्थापित करने और डेटा सेंटर क्षमता बढ़ाने के लिए भी निवेश करने पर विचार करेगा। मंत्रालय के अनुसार, यह नई पहल है और इसे दोनों देशों के संप्रभुता समझौतों के तहत लागू करने पर काम किया जाएगा।
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