प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को एक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए कहा कि जीवन की कठिन परिस्थितियों में शांत रहकर सोच-समझकर निर्णय लेना बेहद आवश्यक है।
सोशल मीडिया पर साझा किया प्रेरणादायक संदेश
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने संदेश में देश के युवाओं की सराहना करते हुए कहा कि आज का युवा जो ठान लेता है, उसे पूरा करके दिखाता है। उन्होंने युवाशक्ति को देश के तेज विकास का प्रमुख आधार बताया।
संस्कृत सुभाषित
“व्यसने वाऽर्थकृच्छ्रे वा भये वा जीवनान्तके।
विमृशन् वै स्वया बुद्ध्या धृतिमान् नावसीदति॥”
सुभाषित का अर्थ
इस सुभाषित का भाव है कि विपत्ति, आर्थिक संकट, भय या जीवन के अंतिम क्षणों जैसी कठिन परिस्थितियों में भी जो व्यक्ति धैर्य बनाए रखते हुए अपनी बुद्धि से निर्णय लेता है, वह कभी विचलित नहीं होता।
सोच-समझकर लिया गया फैसला व्यक्ति को नुकसान और परेशानी से बचाता है।
राष्ट्र निर्माण में युवाओं की अहम भूमिका
- प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सुभाषित मानसिक मजबूती का संदेश देता है और युवाओं को प्रेरित करता है।
- उनके अनुसार, युवाओं की ऊर्जा और संकल्प ही देश को आगे बढ़ाने में सबसे बड़ी ताकत है।