नई दिल्ली: नीट पेपर लीक विवाद के बाद अब सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट और ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम को लेकर राजनीति तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार युवाओं और Gen-Z की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है क्योंकि अब छात्र सवाल पूछने लगे हैं।
CBSE रिजल्ट को लेकर राहुल गांधी का बड़ा हमला
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जोड़ी ने एक और संस्था को विवाद और धांधली का प्रतीक बना दिया है। उन्होंने कहा कि दशकों में पहली बार CBSE बोर्ड परीक्षा को लेकर इतने गंभीर सवाल उठ रहे हैं। राहुल गांधी ने दावा किया कि करीब 18.5 लाख छात्रों ने परीक्षा दी और पिछले एक सप्ताह से ऑन-स्क्रीन मार्किंग, गलत मूल्यांकन और जांच प्रक्रिया में गड़बड़ी की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन सरकार और शिक्षा मंत्रालय इन शिकायतों को नजरअंदाज कर रहे हैं।
“गलत कॉपी जांची गई, मदद मांगने पर बताया देशद्रोही”
राहुल गांधी ने एक छात्र का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि 17 साल का एक छात्र अपनी कॉपी की गलत जांच के खिलाफ सोशल मीडिया पर न्याय मांगने आया था, लेकिन उसे मदद मिलने की बजाय ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा। राहुल ने दावा किया कि बीजेपी की IT सेल ने उस छात्र को “Anti-National”, “Soros का एजेंट” और “Deep State” का हिस्सा तक बता दिया। उन्होंने कहा कि एक छात्र अपने भविष्य को लेकर सवाल पूछता है और सरकार उसे देशद्रोही साबित करने में लग जाती है।
“मोदी सरकार युवाओं और Gen-Z से डरती है”
राहुल गांधी ने कहा कि सच यह है कि मोदी सरकार युवाओं और Gen-Z से डरती है क्योंकि अब नई पीढ़ी सवाल पूछ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो भी सरकार से सवाल करता है, उसे बदनाम करने, डराने और दबाने की कोशिश की जाती है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि यही युवा और यही Gen-Z आने वाले समय में सरकार के अहंकार को तोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से सुनने की बजाय सरकार आलोचना करने वालों को निशाना बना रही है।
जयराम रमेश ने भी उठाए सवाल
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने भी CBSE की नई ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस नई व्यवस्था के कारण देशभर के लाखों छात्र और उनके परिवार असमंजस और तनाव की स्थिति में हैं। जयराम रमेश ने कहा कि मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की गई, जिसकी वजह से छात्रों के भविष्य पर असर पड़ रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय से पूरे मामले पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की।
क्या है ऑन-स्क्रीन मार्किंग विवाद?
CBSE की नई ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली यानी OSM के तहत उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन डिजिटल माध्यम से किया गया है। कई छात्रों और अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि इस नई प्रक्रिया में मार्किंग में गड़बड़ी हुई है और कई छात्रों को अपेक्षा से बेहद कम अंक मिले हैं। सोशल मीडिया पर भी लगातार ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जहां छात्र पुनर्मूल्यांकन की मांग कर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि सरकार और शिक्षा मंत्रालय इन शिकायतों को गंभीरता से नहीं ले रहे।
विपक्ष लगातार शिक्षा व्यवस्था पर उठा रहा सवाल
नीट पेपर लीक मामले के बाद विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर हमला बोल रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता लगातार कमजोर हो रही है। विपक्षी दलों ने सरकार से शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।