नई दिल्ली - अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अब समझौते की उम्मीदें बढ़ने लगी हैं, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। सोमवार, 25 मई को कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई और दाम करीब दो हफ्तों के निचले स्तर पर पहुंच गए। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों देशों के बीच समझौता हो जाता है, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति सामान्य हो सकती है और तेल की कीमतों में और राहत देखने को मिल सकती है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना सबसे बड़ा मुद्दा
हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे बढ़ रही है, लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अभी भी दोनों देशों में मतभेद बने हुए हैं। यह समुद्री मार्ग दुनियाभर के तेल और प्राकृतिक गैस सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है। मिडिल-ईस्ट में तनाव बढ़ने और पाबंदियों के कारण इस रास्ते से तेल आपूर्ति प्रभावित हुई थी, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़ गए थे।
विशेषज्ञों के अनुसार, दुनियाभर में भेजे जाने वाले तेल और LNG की लगभग हर पांच में से एक खेप स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरती है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ता है।
ट्रंप के बयान से बढ़ी उम्मीदें
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने शनिवार को दावा किया था कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच शांति समझौते को लेकर बातचीत काफी हद तक पूरी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच ‘मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ यानी समझौता ज्ञापन पर सहमति बनने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। ट्रंप के इस बयान के बाद निवेशकों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में ऊर्जा संकट कम हो सकता है और तेल की सप्लाई सामान्य होने लगेगी। इसी उम्मीद के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है।