देश में NEET समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के आरोपों को लेकर विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है। इसी क्रम में दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन यानी 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक शांतिपूर्ण मार्च निकाला जाएगा। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया के जरिए बताया कि इस मार्च में देशभर के छात्र, अभिभावक, शिक्षक और आम नागरिकों से शामिल होने की अपील की गई है। उनका कहना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए यह आंदोलन निर्णायक चरण में पहुंच चुका है।
सोनम वांगचुक के अनशन को मिला व्यापक समर्थन
इस आंदोलन को पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधार के मुद्दों पर मुखर रहने वाले सोनम वांगचुक का भी समर्थन मिला है। वांगचुक पिछले 11 दिनों से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में लोगों से आंदोलन का हिस्सा बनने की अपील की। उन्होंने कहा कि केवल सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देने से बदलाव नहीं आएगा, बल्कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने के लिए लोगों को मैदान में आना होगा।
सोशल मीडिया पोस्ट में क्या कहा?
वांगचुक ने अपने संदेश में कहा कि उन्हें लगातार लोग अनशन समाप्त करने की सलाह दे रहे हैं, लेकिन उनका मानना है कि जब तक परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों का समाधान नहीं होगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने उन छात्रों का भी जिक्र किया, जिनकी मौत या आत्महत्या की खबरें सामने आईं। उनका कहना था कि ऐसी घटनाओं को गंभीरता से लेने और परीक्षा व्यवस्था में सुधार लाने की आवश्यकता है।
स्वास्थ्य को लेकर चिंता, फिर भी आंदोलन जारी
आंदोलन के दौरान जारी मेडिकल अपडेट के अनुसार, लंबे अनशन की वजह से सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य पर असर पड़ा है और उनका वजन कम हुआ है। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रखेंगे और नागरिकों से लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करने की अपील की।
क्या हैं आंदोलन की प्रमुख मांगें?
आंदोलनकारी कई प्रमुख मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं-
प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच।
शिक्षा मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की मांग।
परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाना।
प्रभावित छात्रों को न्याय दिलाना।
भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए सख्त व्यवस्था लागू करना।
20 जुलाई के मार्च का क्या उद्देश्य है?
आयोजकों का कहना है कि संसद मार्च का उद्देश्य जनप्रतिनिधियों तक छात्रों की चिंताओं को पहुंचाना और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि मार्च शांतिपूर्ण रहेगा और लोकतांत्रिक दायरे में आयोजित किया जाएगा।
सरकार की ओर से क्या स्थिति है?
फिलहाल शिक्षा मंत्रालय की ओर से इस मार्च को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, सरकार पहले भी परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए कई कदम उठाने की बात कह चुकी है। 20 जुलाई को होने वाले प्रस्तावित मार्च और उसके बाद सरकार की प्रतिक्रिया पर सभी की नजर रहेगी।
FAQs
1. संसद मार्च कब निकाला जाएगा?
20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक शांतिपूर्ण मार्च प्रस्तावित है।
2. आंदोलन किस मुद्दे को लेकर हो रहा है?
NEET समेत प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर।
3. आंदोलन का नेतृत्व कौन कर रहा है?
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक आंदोलन से जुड़े प्रमुख चेहरे हैं।
4. आंदोलन की मुख्य मांग क्या है?
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और प्रभावित छात्रों को न्याय।
5. क्या सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आई है?
फिलहाल इस प्रस्तावित संसद मार्च पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।