तमिलनाडु में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी प्रणाली वन्यजीव संरक्षण की दिशा में बड़ी सफलता साबित हुई है। कोयंबटूर के पास हाथियों के संवेदनशील रेलवे कॉरिडोर पर लगाए गए AI सिस्टम की मदद से पिछले ढाई वर्षों में ट्रेन की चपेट में आकर एक भी हाथी की मौत नहीं हुई। समय रहते जारी किए गए हजारों अलर्ट की बदौलत कई संभावित हादसों को टाला जा सका।
7,100 से अधिक रियल-टाइम अलर्ट जारी
मदुक्करई वन क्षेत्र के पुथुपाथी गांव के पास स्थापित AI कैमरा नेटवर्क ने अब तक हाथियों की गतिविधियों से जुड़े 7,100 से अधिक रियल-टाइम अलर्ट जारी किए हैं। इन अलर्ट के आधार पर लोको पायलटों ने 3,280 से ज्यादा बार ट्रेनों की गति कम की या जरूरत पड़ने पर उन्हें रोक दिया, जिससे हाथियों और ट्रेनों की टक्कर का खतरा काफी कम हो गया।
9,500 बार सुरक्षित पार कराया रेलवे ट्रैक
वन विभाग के अनुसार, इस स्मार्ट निगरानी प्रणाली की मदद से अब तक करीब 9,500 बार हाथियों को सुरक्षित तरीके से रेलवे ट्रैक पार कराया गया है। जैसे ही AI कैमरे ट्रैक के आसपास हाथियों की मौजूदगी का पता लगाते हैं, तुरंत वन विभाग और रेलवे अधिकारियों को अलर्ट भेज दिया जाता है। इसके बाद वनकर्मी मौके पर पहुंचकर हाथियों को सुरक्षित दिशा में ले जाते हैं।
AI, थर्मल कैमरे और कंट्रोल सेंटर की निगरानी
इस परियोजना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, थर्मल इमेजिंग कैमरे और 24 घंटे संचालित कंट्रोल एंड कमांड सेंटर का उपयोग किया जा रहा है। वन अधिकारी, रेलवे कर्मचारी, ड्रोन ऑपरेटर और फील्ड स्टाफ मिलकर हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखते हैं। अलर्ट मिलते ही स्टेशन मास्टर और लोको पायलटों को वायरलेस नेटवर्क के जरिए तत्काल सूचना दी जाती है।
अन्य वन्यजीवों की भी हो रही निगरानी
यह AI सिस्टम केवल हाथियों तक सीमित नहीं है। इसके जरिए गौर (भारतीय बाइसन), हिरण और तेंदुए जैसे अन्य वन्यजीवों की भी पहचान की जा रही है। इसके अलावा AI आधारित ड्रोन जंगलों और रेलवे ट्रैक के आसपास हवाई निगरानी कर रहे हैं, जिससे वन्यजीव संरक्षण और रेलवे संचालन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो रहा है।
वन्यजीव संरक्षण की मिसाल बना तमिलनाडु मॉडल
तमिलनाडु सरकार की यह पहल वन्यजीव संरक्षण और आधुनिक तकनीक के सफल समन्वय का उदाहरण बनकर उभरी है। AI आधारित निगरानी प्रणाली ने न केवल हाथियों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई है, बल्कि रेलवे सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी एक नया मॉडल प्रस्तुत किया है।