मध्य प्रदेश की करीब 96 हजार आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि पिछले चार वर्षों से लंबित करीब 1400 करोड़ रुपये के एरियर का भुगतान जल्द किया जाए। साथ ही, सरकार द्वारा पहले घटाए गए राज्य अंशदान को भी दोबारा लागू करने के आदेश दिए गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
वर्ष 2018 में केंद्र सरकार ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में 1,500 रुपये की वृद्धि की थी। इसके बाद कुछ समय तक बढ़ा हुआ लाभ मिला, लेकिन बाद में मध्य प्रदेश सरकार ने अपने हिस्से का अंशदान कम कर दिया। इसके चलते कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में कमी आ गई। इस निर्णय के खिलाफ आंगनवाड़ी कर्मचारी संगठन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
चार साल का एरियर मिलेगा
हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को वर्ष 2019 से 2023 तक का बकाया एरियर दिया जाएगा। इससे प्रदेश की हजारों महिला कर्मचारियों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है, जो लंबे समय से इस भुगतान का इंतजार कर रही थीं।
ब्याज पर फिलहाल रोक
हालांकि, अदालत ने एरियर के भुगतान का आदेश बरकरार रखा है, लेकिन इस राशि पर 6 प्रतिशत ब्याज देने के निर्देश पर फिलहाल रोक लगा दी है। यानी कार्यकर्ताओं को बकाया राशि तो मिलेगी, लेकिन ब्याज के भुगतान पर अंतिम फैसला आगे की प्रक्रिया के बाद होगा।
सिंगल बेंच के फैसले में हुआ संशोधन
इससे पहले हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने राज्य सरकार को 120 दिनों के भीतर 6 प्रतिशत ब्याज सहित पूरा भुगतान करने का निर्देश दिया था। अब संशोधित आदेश में एरियर और राज्य अंशदान बहाल करने का फैसला कायम रखा गया है, जबकि ब्याज संबंधी आदेश पर रोक लगा दी गई है।
96 हजार परिवारों को मिलेगी राहत
हाईकोर्ट के इस फैसले से प्रदेश की करीब 96 हजार आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से लंबित भुगतान को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में आए इस फैसले को कर्मचारी संगठनों ने महत्वपूर्ण बताया है।