आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी का व्रत इस वर्ष 10 जुलाई, शुक्रवार को रखा जाएगा। सनातन धर्म में भगवान विष्णु को समर्पित इस एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत एवं पूजा करने से व्यक्ति के पापों का क्षय होता है और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
योगिनी एकादशी का धार्मिक महत्व
शास्त्रों के अनुसार, योगिनी एकादशी का व्रत रखने से अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। मान्यता है कि इस व्रत का पुण्य 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर माना जाता है। इसलिए इस दिन पूजा और व्रत के नियमों का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है।
एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते न तोड़ें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। मान्यता है कि इस दिन तुलसी माता भगवान विष्णु के लिए व्रत रखती हैं। इसलिए एकादशी पर तुलसी को जल अर्पित करना और पत्ते तोड़ना वर्जित माना गया है। पूजा के लिए यदि तुलसी की आवश्यकता हो तो उन्हें एक दिन पहले ही तोड़कर रख लेना उचित माना जाता है।
तामसिक भोजन और चावल का करें त्याग
योगिनी एकादशी के दिन लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा और चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। व्रत के दौरान सात्विक भोजन ग्रहण करने की परंपरा है। मान्यता है कि तामसिक भोजन करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।
सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक का करें प्रयोग
यदि व्रत के दौरान फलाहार किया जा रहा है तो सामान्य नमक की बजाय केवल सेंधा नमक का ही उपयोग करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, साधारण नमक का सेवन व्रत के नियमों के विरुद्ध माना जाता है।
क्रोध और विवाद से भी रहें दूर
एकादशी के दिन मन, वचन और कर्म की पवित्रता बनाए रखने की सलाह दी जाती है। इस दिन किसी से विवाद, कटु वचन या झगड़ा करने से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि शांत मन से भगवान विष्णु की पूजा करने पर व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।