लखनऊ- समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि केवल इस्तीफे लेकर मामले को दबाने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए, बल्कि पूरे ट्रस्ट को भंग कर निष्पक्ष न्यायिक जांच कराई जानी चाहिए। अखिलेश ने आरोप लगाया कि यह मामला करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा है, इसलिए इसकी पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए और किसी भी स्तर पर लीपापोती नहीं होनी चाहिए।
'केवल इस्तीफा समाधान नहीं, जिम्मेदारी भी तय हो'
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि सिर्फ इस्तीफे लेकर जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी मामले में ड्राइवर जिम्मेदार माना जा सकता है, तो मालिक और जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों की जवाबदेही क्यों तय नहीं की जा रही। उन्होंने कहा कि पूरे प्रकरण में शीर्ष स्तर तक जवाबदेही तय होनी चाहिए।
जांच रिपोर्ट पर भी उठाए सवाल
सपा प्रमुख ने जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति का नाम अंतरिम रिपोर्ट में नहीं था, वह अंतिम रिपोर्ट में कैसे शामिल हो गया। वहीं जिस व्यक्ति पर पूरा दोष मढ़ा गया, रिपोर्ट के अनुसार उसकी भूमिका भी उतनी गंभीर नहीं दिखती। उन्होंने मांग की कि पूरी जांच पारदर्शी तरीके से हो ताकि किसी निर्दोष को फंसाया न जाए और कोई दोषी बच न सके।
भूमि सौदों और ट्रस्ट के फैसलों की भी जांच की मांग
अखिलेश यादव ने कहा कि इस्तीफा देने वाले लोगों के कार्यकाल में हुए सभी भूमि सौदों, वित्तीय निर्णयों और प्रशासनिक फैसलों की भी न्यायिक जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई कर मामले को समाप्त नहीं किया जा सकता। जिन लोगों ने जिम्मेदारियां सौंपीं और फैसले लिए, उनकी भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
दोषियों की गतिविधियों पर निगरानी की मांग
सपा अध्यक्ष ने मांग की कि मामले से जुड़े सभी आरोपियों की भविष्य की गतिविधियों और विदेश यात्राओं पर भी नजर रखी जाए। उनका कहना है कि यदि जांच के दौरान कोई सबूत प्रभावित करने या देश छोड़ने की कोशिश करता है तो उस पर समय रहते कार्रवाई होनी चाहिए।
'140 करोड़ लोगों की आस्था का सवाल'
अखिलेश यादव ने कहा कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि देश के करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है। ऐसे में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले में पूरी पारदर्शिता दिखानी चाहिए ताकि लोगों का विश्वास बना रहे।
भाजपा पर भी साधा निशाना
इस मुद्दे पर भाजपा को घेरते हुए अखिलेश यादव ने दावा किया कि पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है और कई नेता दूसरी पार्टियों से संपर्क में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा जनता के सवालों से बचने के लिए केवल औपचारिक कार्रवाई कर रही है, जबकि पूरे मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए।