भोपाल की सिटी बस सेवा में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। अब भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड (BCLL) को राज्य सरकार की नई ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ के अधीन कर दिया गया है। इसके साथ ही बस संचालन से राजनीतिक दखल लगभग खत्म हो जाएगा और व्यवस्था पूरी तरह प्रशासनिक अफसरों के हाथ में आ जाएगी। अब तक सिटी बस सेवा में महापौर और मेयर इन काउंसिल (MIC) के सदस्यों की सीधी भूमिका रहती थी, लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद इसका नियंत्रण स्मार्ट सिटी सीईओ के पास रहेगा। फिलहाल अंजू अरुण प्रभारी सीईओ के रूप में जिम्मेदारी संभालती रहेंगी।
नई नीति में प्रदेश को 7 जोन में बांटा गया
राज्य सरकार की नई परिवहन नीति के तहत पूरे मध्य प्रदेश को 7 जोन में विभाजित किया गया है। भोपाल जोन में नर्मदापुरम संभाग को भी शामिल किया गया है। इन क्षेत्रों के कलेक्टर अब क्षेत्रीय परिवहन कंपनी के बोर्ड का हिस्सा होंगे और बस सेवा से जुड़े फैसले लेंगे।
रूट और स्टॉपेज तय करने में नहीं चलेगी सिफारिश
नई व्यवस्था के बाद बस रूट, स्टॉपेज और नई बसों के संचालन को लेकर पार्षदों और MIC सदस्यों की सिफारिशें प्रभावी नहीं रहेंगी। अब क्षेत्रीय कंपनी ही यह तय करेगी कि किस रूट पर कितनी बसें चलेंगी और किराया व परमिट व्यवस्था कैसे संचालित होगी। इससे फैसले तेजी से और जरूरत के हिसाब से लिए जा सकेंगे।
लाइव ट्रैकिंग से होगी बसों की मॉनिटरिंग
सिटी बसों में आने वाली शिकायतों को दूर करने के लिए अब Intelligent Transport Management System लागू किया जाएगा। इस तकनीक के जरिए बसों की लाइव ट्रैकिंग की जा सकेगी और संचालन की मॉनिटरिंग सीधे मुख्यालय से होगी। इससे चालकों की मनमानी और बसों की लेटलतीफी जैसी समस्याओं पर जल्दी कार्रवाई हो सकेगी।
पहले चरण में 398 बसें चलाने की तैयारी
योजना के पहले चरण में भोपाल क्षेत्र के 104 रूट्स पर 398 बसें चलाने की तैयारी की गई है। ये बसें भोपाल शहर के साथ उपनगरीय इलाकों और नर्मदापुरम संभाग के प्रमुख मार्गों को जोड़ेंगी। सरकार इन बसों का संचालन PPP मॉडल यानी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के जरिए कराएगी। इससे नगर निगम पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।
कभी 350 से ज्यादा थीं बसें, अब सिर्फ 70 बचीं
भोपाल में एक समय 350 से ज्यादा सिटी बसें चलती थीं, लेकिन धीरे-धीरे इनकी संख्या कम होती गई। फिलहाल शहर में करीब 70 बसें ही संचालित हो रही हैं। बसों की कमी के कारण यात्रियों की निर्भरता ऑटो और टैक्सी सेवाओं पर काफी बढ़ गई है।