नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस (International Tiger Day 2026) के अवसर पर देशभर में बाघ संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी समेत कई नेताओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से देशवासियों और वन्यजीव प्रेमियों को शुभकामनाएं दीं। सभी नेताओं ने बाघों को भारत की समृद्ध जैव विविधता, प्राकृतिक विरासत और पर्यावरणीय संतुलन का प्रतीक बताते हुए उनके संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया।
योगी आदित्यनाथ बोले- बाघ हमारी प्राकृतिक विरासत का गौरव
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि बाघ भारत का राष्ट्रीय पशु होने के साथ-साथ समृद्ध वन संपदा और जैव विविधता का गौरवशाली प्रतीक है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार बाघ संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और सभी नागरिकों से इस अनमोल प्राकृतिक धरोहर की रक्षा का संकल्प लेने की अपील की।
रेखा गुप्ता ने कहा- बाघों की सुरक्षा, जैव विविधता की सुरक्षा
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने संदेश में कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस भारत के जंगलों के गौरवशाली रक्षक को सम्मान देने का अवसर है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का बाघ संरक्षण अभियान और अधिक मजबूत हुआ है तथा बाघों की सुरक्षा का मतलब देश की समृद्ध जैव विविधता की रक्षा करना है।
भजनलाल शर्मा ने संरक्षण का किया आह्वान
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि बाघ केवल वन्यजीव नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन और प्राकृतिक विरासत के महत्वपूर्ण संरक्षक हैं। उन्होंने लोगों से बाघों और उनके प्राकृतिक आवासों की रक्षा के लिए सामूहिक संकल्प लेने की अपील की।
नायब सिंह सैनी बोले- आने वाली पीढ़ियों के लिए जरूरी है संरक्षण
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि बाघों का संरक्षण केवल वन्यजीवों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति की अमूल्य धरोहर को सुरक्षित रखने का भी संकल्प है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों के सुरक्षित भविष्य के लिए सभी नागरिकों से मिलकर प्रयास करने का आह्वान किया।
क्या है अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस?
हर वर्ष 29 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में आयोजित टाइगर समिट के दौरान हुई थी। इस दिवस का उद्देश्य दुनिया भर में घटती बाघों की संख्या को रोकना, उनके प्राकृतिक आवासों का संरक्षण करना और वन्यजीव संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। भारत दुनिया में सबसे अधिक जंगली बाघों का घर है और प्रोजेक्ट टाइगर जैसी पहल के माध्यम से बाघ संरक्षण में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं।